समंदर में चीन की नई चाल! 205 मीटर के 'मदरशिप' से दूर तक भेजे जाएंगे अंडरवॉटर ड्रोन

वॉशिंगटन। चीन एक विशालकाय मानवरहित मदरशिप बना रहा है। यह प्रायोगिक पनडुब्बी के आकार के ड्रोनों को तैनात करने की शक्ति उसे दे सकता है। यह तैनाती चीन के संरक्षित जल क्षेत्र से काफी दूर की जा सकती है।
शंघाई के हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में निर्माणाधीन यह अज्ञात पोत दिखाई दे रहा है। हालांकि बीजिंग ने न तो इस पोत को स्वीकार किया है और न ही मिशन की पुष्टि की है। वैसे 15 सितंबर 2026 की वाणिज्यिक उपग्रह तस्वीरों में एक बड़े वॉटर ड्रोन को देखा जा सकता है। चीन का रहस्यमयी वॉटर ड्रोन 205-मीटर लंबा हो सकता है। सैटेलाइट पिक्चर्स के एनालिसिस से पता चला है कि इसका स्ट्रक्चर लगभग 27 मीटर चौड़ा है। इतना बड़ा अकार इसे एम्फीबियस शिप के आकार से जोड़ता है। यह असाधारण रूप से बड़े वॉटर ड्रोनों को लॉन्च करने, उन्हों रिकवर करने, रखरखाव करने और परिवहन करने के लिए सक्षम हो सकता है।
यह हो सकती हैं खासियत
इसमें नीचे से खुलने वाला वेट वेल-डेक हो सकता है। इसके साथ ही 12 वर्टिकल जैक-अप आर्म्स द्वारा सस्पेंडेट एक क्रैडल और एक जुड़ा हैंगर शामिल हैं। इसमें संभवतः चार इक्स्ट्रा साइज मानवरहित अंडर वॉट्र विहिकल रखे जा सकते हैं। यह डायमेंशन महत्वपूण है क्योंकि चीन के पास 35 मीटर और 45 मीटर के एक्सपेरिमेंटल व्हीकल्स वर्तमान में हैनान के आसपास स्थित विशेष तैरते डॉकों पर निर्भर हैं। इन्हें इस नए मदरशिप से मदद मिल सकती है।
मदरशिप क्यों हो सकता है भारत के लिए खतरा
इससे भौगोलिक रूप से तटीय सहायता स्थलों पर निर्भरता कम हो जाती है यानी ये समुद्र में दूर कही भी रह कर अपने ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। यह तकनीशियनों, पुर्जों, ऊर्जा आपूर्ति, मिशन पेलोड और रिकवरी उपकरणों को एक साथ ले जाकर इस समीकरण को बदल सकता है। इससे ऑपरेशन क्षमता बढ़ जाती है। इसलिए, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सैन्य योजनाकारों के लिए रणनीतिक मुद्दा एक और असामान्य चीनी पतवार नहीं है, बल्कि एक उभरता हुआ लॉजिस्टिक आर्किटेक्चर है।
इसके मिशनों में खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही काम करना शामिल है। यह समुद्र तल की निगरानी, बारूदी सुरंगों से बचाव, टॉरपीडो या छोटे ड्रोन का परिवहन और केबल से संबंधित गतिविधयां शामिल हैं।




















