युद्ध के बीच खुला अमेरिका का दरवाजा! पेजेश्कियान-अराघची को मिला वीजा, जानें क्यों जा रहे न्यूयॉर्क?

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने की अनुमति दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के मुख्य प्रतिनिधिमंडल और जरूरी कर्मचारियों के वीजा मंजूर होने की जानकारी दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और तनाव बना हुआ है। ऐसे में न्यूयॉर्क में ईरानी नेतृत्व की मौजूदगी पर दुनिया की नजर रहेगी।
पेजेश्कियान और अराघची को मिली एंट्री
अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि ईरान के मुख्य प्रतिनिधिमंडल को अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में होने वाली UN महासभा की बैठक में शामिल होने की अनुमति दी गई है। इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और जरूरी स्टाफ शामिल हैं। यानी दोनों शीर्ष नेता आधिकारिक कार्यक्रम के लिए अमेरिका जा सकते हैं।
क्यों जा रहे हैं अमेरिका?
इस यात्रा का मुख्य मकसद संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लेना है। पेजेश्कियान और उनका प्रतिनिधिमंडल वहां ईरान का पक्ष रखेगा। यह यात्रा किसी घोषित द्विपक्षीय समझौते के लिए नहीं है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों का एक ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूद होना कूटनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण जरूर है।
रूस से तेल खरीदने वालों पर 100% टैरिफ का दबाव, फिर यूरेनियम पर अमेरिका ने क्यों छोड़ी गुंजाइश?
वीजा मिला लेकिन पाबंदियां भी रहेंगी
अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा तो मंजूर किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिकारी न्यूयॉर्क में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूम सकेंगे। रिपोर्टों के अनुसार उनकी आवाजाही पर पहले की तरह सीमाएं लागू रहेंगी। प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियां संयुक्त राष्ट्र परिसर, ईरानी मिशन, राजदूत के आवास और एयरपोर्ट जैसे तय स्थानों तक सीमित रह सकती हैं। कुछ सामान की खरीद पर भी रोक रहेगी।
इस बार छोटा रहेगा ईरानी दल
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस साल ईरान का प्रतिनिधिमंडल पिछले साल की तुलना में छोटा रखा जाएगा। सिर्फ जरूरी अधिकारी और कर्मचारी ही न्यूयॉर्क पहुंचेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल की यात्रा पर सुरक्षा और आवाजाही से जुड़े नियम कड़े रहेंगे। इससे साफ है कि वीजा की मंजूरी के बावजूद दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध नहीं बने हैं।
क्या वीजा का मतलब युद्ध खत्म?
पेजेश्कियान और अराघची को वीजा मिलने के बाद बातचीत की संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन अभी इसे युद्ध खत्म होने का संकेत कहना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच कई गंभीर मुद्दे बने हुए हैं। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं। इसलिए न्यूयॉर्क की बैठक से क्या नतीजा निकलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अमेरिका ने क्यों दी अनुमति?
अमेरिका संयुक्त राष्ट्र का मेजबान देश है और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विदेशी प्रतिनिधियों के आने-जाने को लेकर उसकी कुछ अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसी संदर्भ में ईरानी प्रतिनिधिमंडल को UN महासभा में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अमेरिका के पास सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मामलों में वीजा पर फैसला लेने का अधिकार भी है।
फिलिस्तीनी नेताओं को नहीं मिली ऐसी मंजूरी
ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और कुछ अन्य फिलिस्तीनी अधिकारियों के लिए वीजा से इनकार किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले के पीछे फिलिस्तीनी प्राधिकरण की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय अदालतों से जुड़े मामलों को कारण बताया है। इस तरह इस साल UN महासभा के लिए ईरान और फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल के मामले में अमेरिकी फैसले अलग रहे हैं।
न्यूयॉर्क में अब क्या होगा?
अब सबसे ज्यादा ध्यान पेजेश्कियान के UN महासभा में होने वाले कार्यक्रम और ईरानी प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियों पर रहेगा। अगर इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होती है, तो उससे आगे की कूटनीति को लेकर नई तस्वीर सामने आ सकती है।



















