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हेल्थ अपडेट : ट्रेंड नहीं, हेल्थ है सबसे जरूरी...मल्टी विटामिन्स के ओवरडोज से बिगड़ सकती है सेहत

बेहद खतरनाक है आजकल यंगस्टर्स में बढ़ रहा डाइट सप्लीमेंट्स लेने का चलन
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हेल्थ अपडेट : ट्रेंड नहीं, हेल्थ है सबसे जरूरी...मल्टी विटामिन्स के ओवरडोज से बिगड़ सकती है सेहत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रीति जैन

    भोपाल। ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर खरीदारी के साथ-साथ यंगस्टर्स को अट्रैक्ट करने के लिए उन्हें ग्लॉसी स्किन, बेहतर गट हेल्थ और हेयर केयर के लिए मल्टी विटामिन्स के विज्ञापन खूब दिखाए जाते हैं। अट्रैक्टिव पैकेजिंग और फायदों की लंबी फेहरिस्त यह अहसास कराती है कि जो पोषण खाने से नहीं मिल पाएगा, वह मल्टीविटामिन्स से आसानी से मिल जाएगा। यही वजह है कि आजकल यंगस्टर्स अपने बैग में मल्टीविटामिन्स लेकर चलने लगे हैं, ताकि जो कमियां हैं वे पूरी हो सकें। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट व न्यूट्रीशनिस्ट उनकी इस धारणा से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि 70 फीसदी लोग अपनी मर्जी से मल्टी विटामिन्स ले रहे हैं, जो कि गलत है। यह चिकित्सक के परामर्श से लिया जाए, तो फायदेमंद हो सकता है। इस मामले में मनमर्जी खतरनाक हो सकती है।

    दो मामले जिसमें मनमर्जी से लिए गए सप्लीमेंट

    केस-1-न्यूट्रिशनिस्ट के पास एक केस आया, जिसमें एक लड़की ने यह सोचकर की उसके घुटनों से चटकने आवाज आती है, उसने कैल्शियम सप्लीमेंट खाने शुरू कर दिए। कैल्शियम सप्लीमेंट्स डॉक्टर इसकी कमी होने पर दो महीने तक ही खाने की सलाह देते हैं, वो भी विटामिन-डी के साथ, लेकिन उसने कई महीने तक ऐसा किया, जिससे उसके लिवर पर बुरा असर पड़ा।

    केस-2-हेयर इंफेक्शन के कारण हेयर फॉल हो रहा था, लेकिन एक लड़के ने सोचा कि उसे एलोपेशिया हो गया है, तो वो बायोटिन और उससे संबंधित टैबलेट्स खाने लगा, लेकिन हेयर फॉल रूका नहीं, दरअसल उसे इंफेक्शन हुआ था। डॉक्टर ने उसे बताया कि हेयर फॉल का कारण एक ही नहीं होता, इसलिए इसकी मेडिसिन भी एक नहीं हो सकती है।

    अधिकता से लिवर पर पड़ता है भारी दबाव

    इस मामले में न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. रश्मि श्रीवास्तव कहती हैं, अगर किसी व्यक्ति के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाए और खानपान के जरिए न्यूट्रिशंस की कमी पूरी न हो, तब उस कंडीशन में डॉक्टर मल्टीविटामिन टैबलेट लेने की सलाह देते हैं। लेकिन सिर्फ ट्रेंड फॉलो करके या फिर इंस्टा पोस्ट या विज्ञापन देखकर अपनी मर्जी से मल्टीविटामिन खाने से लिवर पर बुरा असर पड़ता है। मल्टीविटामिन में कुछ ऐसे पोषक तत्व जैसे विटामिन- ए, डी, ई और के आदि जो फैट में घुलते हैं और शरीर में स्टोर हो जाते हैं। मल्टीविटामिन का अधिक सेवन करने पर इनकी मात्रा बढ़ जाती है, तो लिवर पर इनको प्रोसेस करने का भारी दबाव पड़ता है। ज्यादा विटामिन-ए लेने से लिवर टॉक्सिसिटी हो सकती है। इससे लिवर एंजाइम्स असंतुलित हो सकते हैं और फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।

    इस मामले में मनमर्जी बिल्कुल ठीक नहीं

    वर्किंग प्रोफेशनल अरुण सिंह कहते हैं कि मैंने कोलोजन बूस्ट करने के लिए सप्लीमेंट्स खाने शुरू कर दिए। सप्लीमेंट्स खाने से स्किन अच्छी रहती है। लेकिन यह काफी हैवी थे, इस लिए कुछ ही दिनों में इसके दुष्परिणाम दिखाई देने लगे। इनके प्रयोग से मेरी गट हेल्थ बिगड़ने लगी। जब समस्या समझ में आई तो मैंने इसे खाना बंद कर दिया। डॉक्टर से परामर्श लिया तो उन्होंने बताया कि इससे बेहतर तो यह है वॉटर इंटेक और सलाद को डाइट में बढ़ाना चाहिए। उनसे पता पता चला कि मल्टीविटामिन्स बॉडी मास इंडेक्स, मसल्स मास, फैट कंपोजिशन के हिसाब से तय होता है। इसके लिए विशेषज्ञ से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। अपने स्तर पर इनका इस्तेमाल समस्याएं पैदा कर सकता है।

    Aniruddh Singh
    By Aniruddh Singh

    अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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