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Cowdung Products:घर बैठे कमाई का आसान तरीका, गोबर से बनाएँ धूपबत्ती और हवन सामग्री

मुरादाबाद के अमरीश शर्मा ने देसी चीजों से एक नया प्रयोग किया है। वे गाय के गोबर, गुग्गुल, कपूर और हवन सामग्री को मिलाकर प्राकृतिक धूपबत्ती बनाते हैं। यह धूपबत्ती घर में खुशबू फैलाती है और वातावरण को शुद्ध भी करती है। आप भी इसे घर पर आसानी से बना सकते हैं, जानिए इसका सही तरीका।
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घर बैठे कमाई का आसान तरीका, गोबर से बनाएँ धूपबत्ती और हवन सामग्री
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    उत्तर प्रदेश। मुरादाबाद के अमरीश शर्मा ने एक आनोखी पहल की है। उन्होंने देसी संसाधनों का उपयोग करके गाय के गोबर से सुगंधित धूपबत्तियां और हवन कप बनाना शुरू किया है। ये धूपबत्तियां पूरी तरह प्राकृतिक हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचातीं। इनकी खुशबू मन को भाती है और बाजार में इनकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है। अमरीश का यह प्रयास न सिर्फ धार्मिक उपयोग के लिए उपयोगी है, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखने की दिशा में भी एक सुंदर कदम है।

    आनोखी पर्यावरण पहल

    मुरादाबाद के अमरीश शर्मा ने देसी संसाधनों का उपयोग करके एक नया और अनोखा काम शुरू किया है। वे गाय के गोबर से सुगंधित धूपबत्ती और हवन कप बनाते हैं। ये धूपबत्तियां न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि इनकी प्राकृतिक खुशबू लोगों को बहुत पसंद आ रही है। बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर नवरात्र जैसे त्योहारों के समय।

    प्राकृतिक सामग्री

    अमरीश बताते हैं कि वे धूपबत्ती को पूरी तरह प्राकृतिक चीजों से तैयार करते हैं। इसमें गाय का गोबर, हवन सामग्री, गुग्गुल, कपूर, चंदन और अन्य सुगंधित तत्वों का प्रयोग किया जाता है। जब इसे जलाया जाता है, तो पूरा घर सुगंध से भर जाता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।

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    घर पर भी बन सकती है

    अमरीश का कहना है कि कोई भी व्यक्ति इस विधि से घर पर भी आसानी से धूपबत्ती बना सकता है। इसके लिए ताजा गोबर में लकड़ी का बुरादा या नारियल का छिलका चूरा, थोड़ा गेहूं का आटा या गोंद बाइंडर के रूप में और खुशबू के लिए कपूर, गुग्गुल या चंदन मिलाया जाता है। इस मिश्रण को अच्छे से गूंथकर धूपबत्ती के आकार में तैयार किया जाता है।

    सुखाने और उपयोग की प्रक्रिया

    तैयार की गई धूपबत्तियों को छाया में दो से तीन दिन तक सुखाया जाता है। सूखने के बाद इन्हें जलाने पर हल्की और मनमोहक खुशबू फैलती है। इसी मिश्रण से गोबर के हवन कप या गोलियां भी बनाई जाती हैं, जो कपूर से आसानी से जल जाती हैं।

    लाभ और लोकप्रियता

    गोबर से बनी ये धूपबत्तियां पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। इनमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध होता है। कम कीमत और सुगंध के कारण लोग इन्हें बड़ी संख्या में खरीद रहे हैं, जिससे अमरीश शर्मा का यह देसी प्रयोग सफल और प्रेरणादायक बन गया है।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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