Aniruddh Singh
8 Jan 2026
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक भर्ती में कम पदों के खिलाफ मंगलवार को भोपाल में बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेशभर से करीब 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) व जनजातीय कार्य विभाग का संयुक्त घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।
भविष्य के शिक्षकों का आरोप है कि हजारों पद खाली होने के बावजूद भर्ती में केवल गिने-चुने पद घोषित किए जा रहे हैं। इससे योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल रहा और स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शनकारी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर सरकार उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लेती, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे चरण में बदल दिया जाएगा। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक (वर्ग-2) और प्राथमिक शिक्षक (वर्ग-3) चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही है।
रिक्त पदों का हाल-
माध्यमिक शिक्षक: 99,197 पद
प्राथमिक शिक्षक: 1,31,152 पद
वर्तमान भर्ती में-
माध्यमिक शिक्षक: 10,800 पद
प्राथमिक शिक्षक: 13,089 पद
प्रदर्शनकारी कहते हैं कि वास्तविक जरूरत के मुकाबले घोषित पद बहुत कम हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कई विषयों में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कोई पद नहीं दिए गए, जिससे इन वर्गों के युवाओं में निराशा है। उनका कहना है कि यह सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि पदों की कमी से छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। इससे शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और परीक्षा परिणामों पर भी असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात सुधारने पर जोर दिया गया है, लेकिन पर्याप्त नियुक्तियों के बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।