क्रिकेट पिच पर दबंगई का खेल!सरपंच के बेटे ने खेल के मैदान में घुसाया ट्रैक्टर

मध्य प्रदेश के गुना जिले की मधुसूदनगढ़ तहसील स्थित ग्राम पंचायत जांगरू से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गांव के सरकारी स्कूल के खेल मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों के साथ खुलेआम दबंगई की गई। आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच के बेटे ने बच्चों को गालियां देकर भगाया और फिर मैदान को नुकसान पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर चला दिया।
किसने इजाजत दी खेलने की?
प्रत्यक्षदर्शियों और बच्चों के अनुसार, सोमवार शाम बच्चे रोज की तरह स्कूल के खेल मैदान में क्रिकेट खेल रहे थे। तभी अचानक सरपंच का पुत्र ट्रैक्टर लेकर वहां पहुंचा। उसने बच्चों से अभद्र भाषा में बात की और पूछा कि उन्हें यहां खेलने की इजाजत किसने दी। बच्चों के मना करने और मैदान खाली न करने पर आरोपी और आक्रामक हो गया। उसने ट्रैक्टर का पंजा जमीन में उतार दिया और पूरे खेल मैदान को खोदना शुरू कर दिया, ताकि वहां कोई खेल न सके।
ट्रैक्टर चढ़ाने का आरोप, बाल-बाल बचे बच्चे
बच्चों का आरोप है कि जब उन्होंने ट्रैक्टर रोकने की कोशिश की और सामने आकर मना किया, तो आरोपी ने उन पर ही ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। हालात इतने डरावने हो गए कि बच्चे जान बचाकर मैदान से हटे। घटना के वक्त वहां मौजूद कुछ युवकों ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया। यही वीडियो आगे चलकर पूरे मामले की वजह बना।
वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
घटना के दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। पहले वीडियो में साफ दिख रहा है कि सरपंच का पुत्र ट्रैक्टर के पंजे से खेल मैदान को तहस-नहस कर रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन और मीडिया ने जब सवाल उठाए, तो पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। अधिकारियों की फटकार के बाद आरोपी के तेवर अचानक बदल गए।
दूसरा वीडियो और बदली हुई कहानी
दूसरे वीडियो में सरपंच का पुत्र सफाई देता नजर आता है। वह कहता है कि वह मैदान का सुधार कार्य करवा रहा था और पिच को बेहतर बनाने के लिए जमीन खुदवाई जा रही थी। हालांकि, ग्रामीणों और बच्चों का कहना है कि यह सफाई सिर्फ दबाव में दी गई है। उनका साफ आरोप है कि मैदान सुधारने का कोई काम नहीं हो रहा था, बल्कि बच्चों को डराने और वहां से भगाने के लिए जानबूझकर मैदान को खराब किया गया।
ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद गांव के लोगों और बच्चों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला है और बच्चों की जान जोखिम में डाली गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी अपनी ताकत के दम पर बच्चों के अधिकारों को न कुचल सके।











