लोकायुक्त टीम ने सागर में डेढ़ लाख रिश्वत लेते पीएचई के कार्यपालन यंत्री और ड्राइवर को गिरफ्तार किया

सागर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सागर जिले में पदस्थ पीएचई के कार्यपालन यंत्री और उसके ड्राइवर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों को कराने और लंबित भुगतान व कार्य आदेश जारी करने के बदले रिश्वत लेने के मामले में की गई है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, पीएचई के प्रभारी कार्यपालन यंत्री संतोषी लाल बाथम ने जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों के लिए ठेकेदार से अवैध रूप से रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता शैलेश कुमार, जो वर्ष 2022 से जल जीवन मिशन के तहत कार्य कर रहा है, ने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त में दर्ज कराई थी।
शैलेश कुमार सागर जिले के राजघाट रोड का निवासी है और मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के ग्राम सवना का रहने वाला है। शिकायत के अनुसार विभाग द्वारा अधूरे पड़े कार्यों को पूरा कराने के लिए ठेकेदारों से सहमति मांगी गई थी। शैलेश कुमार ने इस पर सहमति दी और नियमों के तहत बिल ऑफ क्वांटिटी की कुल राशि 2 करोड़ 16 लाख 52 हजार रुपये का पांच प्रतिशत एफडीआर के माध्यम से शासन के पास जमा कर दिया। इसके बावजूद कार्य आदेश जारी करने और पुराने लंबित बिलों का भुगतान कराने के एवज में कार्यपालन यंत्री ने रिश्वत की मांग शुरू कर दी। लोकायुक्त एसपी सागर योगेश्वर शर्मा ने बताया कि आरोपी कार्यपालन यंत्री ने कुल छह लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जो कि साढ़े तीन प्रतिशत के हिसाब से तय की गई थी।
यह राशि किश्तों में देने की बात कही गई थी। शिकायत की प्राथमिक जांच और सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने बुधवार को पीएचई कार्यालय में ट्रैप की कार्रवाई की। जाल बिछाकर लोकायुक्त टीम ने जैसे ही आरोपी कार्यपालन यंत्री ने अपने ड्राइवर फूल सिंह यादव के माध्यम से रिश्वत की पहली किश्त के रूप में डेढ़ लाख रुपये लिए, उसी समय दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई। इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि आरोपी किसी तरह बच न सके। लोकायुक्त की इस ट्रैप टीम में निरीक्षक कमल सिंह उइके और रंजीत सिंह सहित लोकायुक्त सागर इकाई का अन्य स्टाफ शामिल रहा। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।





















