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अच्छी खबर : देश में पहली बार थैलेसीमिया मरीजों की जिओ मैपिंग मप्र में होगी , नि:शुल्क देना ही होगा ब्लड

देश में पहली बार थैलेसीमिया के मरीजों जिओ मैपिंग मप्र में होगी। मरीजों की थैलेसीमिया रजिस्ट्री की जाएगी। इससे रक्त चढ़वाने, सर्टिफिकेट बनवाने और जांच के लिए मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगी। मरीजों की हिस्ट्री रिकॉर्ड पर रहेगी।
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देश में पहली बार थैलेसीमिया मरीजों की जिओ मैपिंग मप्र में होगी , नि:शुल्क देना ही होगा ब्लड
AI Image

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल।सीहोर की 10 वर्षीय सना के लिए हर माह का 18वां दिन चिंता लेकर आता है। मां के साथ सुबह भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज पहुंचना, घंटों लाइन में लगना और फिर ब्लड का इंतजार। कई बार ब्लड नहीं मिलने पर परिवार को निजी ब्लड बैंक का सहारा लेना पड़ता है। मजदूरी करने वाले पिता कहते हैं कि बेटी का इलाज अब बीमारी से ज्यादा सफर और खर्च की लड़ाई बन गया है। सिर्फ सना ही नहीं प्रदेश में थैलेसीमिया से जूझ रहे 15 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी हर 15 से 20 दिन में होने वाले ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर टिकी है। रक्त चढ़वाने, सर्टिफिकेट बनवाने और जांच के लिए मरीजों को जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

मरीजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा

ग्रामीण परिवारों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि वहां पहुंचने के बाद भी समय पर रक्त मिल जाए इसकी गारंटी नहीं होती। अब इन्हीं परेशानियों को कम करने के लिए देश में पहली बार मप्र में थैलेसीमिया मरीजों की राष्ट्रीय रजिस्ट्री और जिओ मैपिंग की तैयारी की जा रही है। इसके तहत हर मरीज का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिसमें उसका पता, ब्लड ग्रुप, ट्रांसफ्यूजन का डाटा और आसपास उपलब्ध ब्लड बैंक व अस्पतालों की जानकारी दर्ज रहेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को घर के पास मौजूद अस्पतालों और ब्लड बैंकों से जोड़ा जा सकेगा। यही नहीं रजिस्ट्री से इन मरीजों की वास्तविक संख्या मिल सकेगी। विभाग का मानना है कि अभी उन्हीं मरीजों की जानकारी है जो रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनकी संख्या इससे ज्यादा हो सकती है।

इलाज से ज्यादा मुश्किल हर महीने का सफर

सागर के पास महुआखेड़ा गांव के 13 साल के मोहित मुकाती और परिवार को हर 15 दिन में सागर मेडिकल कॉलेज आना पड़ता है। मोहित के पिता बताते हैं कि उनका गांव 150 किमी दूर है। परिवार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला स्तर पर ही ब्लड मिल सकेगा।

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ब्लड बैंक के लिए नई शर्त

सरकार नई गाइडलाइन तैयार कर रही है, जिसमें लाइसेंस प्रक्रिया में थैलेसीमिया मरीजों की जरूरतों को भी जोड़ा जाएगा। ब्लड बैंकों को अब थैलेसीमिया मरीजों को अनिवार्य रूप से नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराना होना।

ऐसे मिलेगी राहत

एनएचएम की उप संचालक (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) डॉ. रूबी खान के मुताबिक नई जिओ मैपिंग व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद उनके आसपास कौन से ब्लड बैंक और अस्पताल हैं, उनकी जानकारी जुटाई जाएगी। इसके साथ इस क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इस डाटा कंपाइल करने के बाद एनजीओ को जिम्मेदारी दी जाएगी।

इंदौर और भोपाल में समाजसेवी कर रहे काम

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए इंदौर और भोपाल के समाजसेवी भी काम कर रहे हैं। इंदौर में कुछ महिला डॉक्टर्स तो भोपाल में गुरुनानक मंडल से ऐसे बच्चों की मदद कर रही है।

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क्या है थैलेसीमिया

थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रक्त रोग है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। ऐसे बच्चों को हर 15 से 20 दिन में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में हजारों बच्चे नियमित ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर हैं। समय पर रक्त नहीं मिलने पर गंभीर जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

मरीजों को घर के पास मिलेंगी सुविधाएं

थैलेसीमिया से जूझ रहे मरीजों के लिए लगातार काम किया जा रहा है। नई व्यवस्था होने से इन बच्चों को घर के पास ही सारी सुविधाएं मिलेगी। इससे उनका इलाज और आसान होगा।

सलोनी सिडाना, एमडी, एनएचएम

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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