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तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री गिरफ्तार: प्राइवेट स्कूलों की मान्यता के बदले 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप

तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यमोझी को 26 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई 100 करोड़ रुपए घोटाला मामले में मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद हुई। पुलिस के मुताबिक, प्राइवेट स्कूलों की मान्यता और सरकारी मंजूरी के बदले पैसे लेने के आरोप हैं। इस मामले में ED Investigation भी जारी है। पूर्व मंत्री ने आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री गिरफ्तार: प्राइवेट स्कूलों की मान्यता के बदले 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप

तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यमोझी को सोमवार, 26 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई की। मामला कथित 100 करोड़ रुपए घोटाले से जुड़ा है। इसमें निजी स्कूलों को मान्यता और सरकारी मंजूरी दिलाने के बदले पैसे लेने के आरोप हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले राहत देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

पुलिस की कार्रवाई के बाद Anbil Mahesh Poyyamozhi का मामला फिर चर्चा में आया है। हालांकि, गिरफ्तारी का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। मामले में जांच जारी है। आरोपों की सच्चाई अदालत में तय होगी।

स्कूलों की मान्यता के बदले पैसे लेने का आरोप

पुलिस के अनुसार, मामले में निजी स्कूलों के प्रबंधन से पैसे लेने के आरोप हैं। आरोप है कि पार्टी फंड के नाम पर रकम जुटाई गई। इसके बदले स्थायी मान्यता और दूसरी प्रशासनिक मंजूरियां दिलाने का भरोसा दिया गया। जांच एजेंसियां इन आरोपों और कथित लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं।

इस मामले में Private School Scam का आरोप स्कूलों की सरकारी मंजूरी से जुड़ा है। पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपों में सरकारी अनुमति दिलाने के नाम पर कथित वित्तीय लेनदेन शामिल हैं। पूर्व मंत्री 2021 से 2026 तक शिक्षा विभाग के मंत्री रहे। पुलिस उनके कार्यकाल के दौरान हुए कथित लेनदेन की जांच कर रही है। जांच का प्रमुख सवाल इन पैसों के संग्रह और इस्तेमाल से जुड़ा है।

मद्रास हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?

26 अक्टूबर को मद्रास हाईकोर्ट ने अनबिल महेश की याचिका खारिज की। इसके कुछ घंटे बाद चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा ने उन्हें गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में आगे की जांच की जरूरत बताई थी। अदालत की कार्यवाही के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

अग्रिम जमानत गिरफ्तारी से पहले मांगी जाने वाली कानूनी राहत है। याचिका खारिज होने के बाद संबंधित मामले में गिरफ्तारी का रास्ता खुला। हालांकि, इससे किसी आरोपी के खिलाफ आरोप अपने आप साबित नहीं होते। आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

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जांच में पहले भी हुई गिरफ्तारियां

इस मामले में पूर्व मंत्री अकेले आरोपी नहीं हैं। पुलिस ने पहले बीटी अरासकुमार और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। अरासकुमार तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन से जुड़े बताए गए हैं। जांच एजेंसियां निजी स्कूलों से कथित तौर पर जुटाई गई रकम की पड़ताल कर रही हैं।

शिकायत के बाद जांच का दायरा बढ़ा था। पुलिस ने चेन्नई और तिरुचि में संबंधित ठिकानों पर तलाशी भी ली। जांच में दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल की गई। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य कथित वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका समझना है।

छापेमारी में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तलाशी के दौरान 118 वस्तुएं जब्त की गई थीं। इनमें संपत्ति के दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और 18 मोबाइल फोन शामिल थे। लैपटॉप और टैबलेट भी जब्त किए गए। जांच एजेंसियां इन सामग्रियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।

बैंक स्टेटमेंट से वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिल सकती है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी मामले से संबंधित सामग्री हो सकती है। हालांकि, जब्ती अपने आप किसी व्यक्ति की भूमिका साबित नहीं करती। जांच में सामने आने वाले प्रमाणों का कानूनी महत्व होगा।

ईडी भी कर रही वित्तीय लेनदेन की जांच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच कर रहा है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया है। इसका उद्देश्य कथित अवैध धन के स्रोत और लेनदेन की जांच करना है। ED Investigation के तहत वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल महत्वपूर्ण है।

पुलिस की जांच और ईडी की जांच के उद्देश्य संबंधित हो सकते हैं। फिर भी दोनों एजेंसियों की कानूनी भूमिकाएं अलग हैं। पुलिस कथित अपराध से जुड़े सबूत जुटा रही है। ईडी कथित धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच कर रही है।

पूर्व मंत्री ने आरोपों को बताया राजनीतिक बदला

अनबिल महेश ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने छापेमारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। उनका दावा था कि राज्य सरकार की योजनाओं की आलोचना के बाद कार्रवाई हुई। उन्होंने नए सचिवालय परिसर की प्रस्तावित योजना पर भी सवाल उठाए थे।

उनके मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत 1,200 करोड़ रुपए है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपने सार्वजनिक भाषणों का उल्लेख किया था। ये उनके अपने दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती। दूसरी ओर, पुलिस मामले में आरोपों की जांच कर रही है।

अब जांच के नतीजों पर नजर

इस मामले में गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस कथित वसूली, सरकारी मंजूरियों और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। ईडी वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। अनबिल महेश के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

फिलहाल, मामले में दो पहलू महत्वपूर्ण हैं। पहला, निजी स्कूलों से कथित तौर पर पैसे लेने के आरोपों की पुष्टि। दूसरा, संबंधित धन और सरकारी मंजूरियों के बीच कथित संबंध की जांच। अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही सामने आएंगे।

Jitendra Shrivastava
By Jitendra Shrivastava

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