सुप्रीम कोर्ट का आदेश: हर अदालत में महिला वकीलों को मिलेगा अलग बार रूम और टॉयलेट, CJI सूर्यकांत की पीठ का फैसला

सुप्रीम कोर्ट का साफ आदेश है कि हर अदालत में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम (वकीलों का कक्ष) बनेगा। CJI SuryaKant की अगुवाई वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया। इसमें जिला, अनुमंडल (जिले का उप-खंड) और तहसील स्तर की हर अदालत शामिल है। अदालतों में शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी देनी होंगी। क्या छोटी अदालतों में भी यह मुमकिन होगा? यह Supreme Court women lawyers मामला सारिका त्यागी बनाम भारत सरकार से जुड़ा है। अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या कहता है?
पीठ ने जिला, अनुमंडल और तहसील स्तर की हर अदालत का जिक्र किया। वहां महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और शौचालय जरूरी बताए गए। साथ ही दूसरी जरूरी सुविधाएं भी देनी होंगी। कोर्ट ने सुझाया कि देशभर में एक समान व्यवस्था अपनाई जाए। इससे राज्यों और अदालतों के बीच सुविधाओं का अंतर घट सकता है।
अदालत की सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
Supreme Court order on court facilities सभी राज्यों पर लागू होगा। हाई कोर्ट भी इसके दायरे में हैं। इसका मतलब है कि कोई राज्य या हाई कोर्ट इससे बाहर नहीं है। हाई कोर्ट की इंफ्रास्ट्रक्चर समितियों (बुनियादी ढांचा देखने वाली समितियों) को जिम्मेदारी मिली है। ये समितियां सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर तैयार कराएंगी।
कौन सी अदालतें दायरे में आएंगी?
आदेश में तीन स्तर की अदालतों का नाम है-
पहला जिला स्तर।
दूसरा अनुमंडल स्तर।
तीसरा तहसील स्तर।
यानी तहसील स्तर की अदालतें भी इसके दायरे में आती हैं।
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महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम क्यों?
Women lawyers bar room यानी महिला वकीलों का अलग कक्ष। कोर्ट ने इसे बुनियादी सुविधा माना है। शौचालय भी इसी सूची में है। आदेश में कम से कम दो चीजों के नाम हैं। पहली चीज है अलग बार रूम। दूसरी चीज है शौचालय। इनके अलावा दूसरी जरूरी सुविधाओं का भी जिक्र है।
सुप्रीम कोर्ट महिला वकीलों की बुनियादी सुविधाओं पर समझौता नहीं चाहता। यह जिम्मेदारी इस आधार पर नहीं टल सकती कि महिला वकील कम हैं। कोर्ट के मुताबिक संख्या चाहे जितनी हो, सुविधाएं देनी ही होंगी। सोचिए एक बार। जिस दफ्तर में रोज काम हो, वहां बुनियादी सुविधाएं न हों तो?
सीजेआई सूर्यकांत: पीछे हटने का सवाल नहीं
“यही निर्देश है। हम इससे हटना नहीं चाहते।”
- सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
सीजेआई (CJI – Chief Justice of India) सूर्यकांत की पीठ ने फैसला सुनाया। उन्होंने सुनवाई के दौरान यह बात कही। यानी अदालत के निर्देशों से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।
अटॉर्नी जनरल को क्या जिम्मेदारी मिली?
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी अब नोडल अधिकारी (तालमेल देखने वाले अफसर) हैं। वे राज्यों और संबंधित पक्षों से मिलने वाली प्रगति रिपोर्ट एक जगह जुटाएंगे। निर्देशों के पालन में तालमेल बनाना भी उनका काम होगा। जिम्मेदारी की कड़ी देखें तो तीन स्तर बनते हैं। राज्य जमीन और बजट देंगे। हाई कोर्ट की समितियां सुविधाएं तैयार कराएंगी। अटॉर्नी जनरल प्रगति रिपोर्ट एक जगह जुटाएंगे।
महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग बार रूम
अब Separate bar room for women advocates हर राज्य की जिम्मेदारी बन गया है। यह आदेश अदालत परिसर की बुनियादी व्यवस्था से जुड़ा है। लेकिन असली परीक्षा अमल की है। क्या हर तहसील में यह व्यवस्था समय पर बन पाएगी?
2 दिसंबर को क्या होगा?
अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर की तारीख तय की है। उस दिन सभी राज्य और संबंधित हाई कोर्ट अपनी प्रगति बताएंगे। यह प्रगति महिला वकीलों के लिए जरूरी सुविधाओं से जुड़ी होगी। इस तारीख पर राज्यों और हाई कोर्ट की रिपोर्ट सामने आएगी। उसी से पता चलेगा कि काम कितना पूरा हुआ। अब सबकी नजर 2 दिसंबर पर है। आदेश साफ है और तारीख तय है। अब जमीन पर काम की बारी है।




















