Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

शाहजहांपुर: अपनी बहन नहीं थी, तो 184 लड़कियों का भाई बन गया कारोबारी, विनय अग्रवाल ने 101 कन्याओं का कराया सामूहिक विवाह

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में कारोबारी विनय अग्रवाल अपनी अनूठी पहल से जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के लिए भाई की भूमिका निभा रहे हैं। अपनी कोई सगी बहन नहीं होने की कमी को उन्होंने समाजसेवा में बदला और अब तक 184 लड़कियों की शादी कराने में मदद कर चुके हैं।
शाहजहांपुर: अपनी बहन नहीं थी, तो 184 लड़कियों का भाई बन गया कारोबारी, विनय अग्रवाल ने 101 कन्याओं का कराया सामूहिक विवाह
अपनी बहन नहीं थी, तो 184 लड़कियों का भाई बन गया कारोबारी

शाहजहांपुर। खिरनी बाग में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में विनय अग्रवाल ने 101 कन्याओं का विवाह कराया, जिनमें 93 हिंदू और 8 मुस्लिम बेटियां शामिल थीं। समारोह में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह और मुस्लिम कन्याओं का निकाह कराया गया। सभी जोड़ों को गृहस्थी शुरू करने के लिए टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पलंग और अलमारी समेत जरूरी सामान दिया गया। विनय अग्रवाल यह आयोजन अपने संसाधनों से करते हैं और इसके लिए किसी से आर्थिक मदद नहीं लेते।

बहन नहीं थी, इसलिए जरूरतमंद बेटियों का भाई बनने का लिया फैसला

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के कारोबारी विनय अग्रवाल अपनी कोई सगी बहन नहीं होने के कारण हमेशा बहनों की कमी महसूस करते थे। इसी भावना ने उन्हें जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शुरुआत में बिना बुलाए शादियों में पहुंचकर सहयोग करना शुरू किया, लेकिन बाद में उनकी मां सरोज अग्रवाल की सलाह पर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने लगे। पहले 11, फिर 21 और 51 कन्याओं की शादी कराने के बाद अब उन्होंने 101 बेटियों का विवाह कराया है।

ये भी पढ़ें: CG News : छत्तीसगढ़ में शादियों का रिकॉर्ड : एक दिन में एक साथ 6 हजार से ज्यादा जोड़ों का विवाह

101 बेटियों की शादी में 93 हिंदू और 8 मुस्लिम कन्याएं शामिल

विनय अग्रवाल ने रविवार को शाहजहांपुर के खिरनी बाग में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया, जिसमें 101 कन्याओं का विवाह संपन्न कराया गया। इनमें 93 हिंदू और 8 मुस्लिम कन्याएं शामिल थीं। हिंदू बेटियों का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से हुआ, जबकि मुस्लिम कन्याओं का निकाह काजियों ने पढ़वाया। समारोह में वैदिक मंत्रों के साथ इस्लामी आयतें भी गूंजती रहीं और सभी जोड़ों ने अपने नए जीवन की शुरुआत की।

पिता के जन्मदिन के आसपास हर साल कराते हैं सामूहिक विवाह

विनय अग्रवाल ने बताया कि उनके दिवंगत पिता अशोक अग्रवाल का जन्मदिन रामनवमी के आसपास पड़ता है और इसी दौरान वह हर साल सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करते हैं। विवाह से करीब दो महीने पहले गांवों में बैठकें कर आवेदन मांगे जाते हैं। इस बार लगभग 200 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से जरूरतमंद परिवारों की पहचान के लिए तीन चरणों में जांच कराई गई। इसके बाद 101 कन्याओं का चयन किया गया, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को इस पहल का लाभ मिल सके।

बेटियों को दिया गृहस्थी का सामान

इस समारोह में केवल शादी की रस्में ही नहीं निभाई गईं, बल्कि बेटियों की नई गृहस्थी बसाने का भी इंतजाम किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सभी कन्याओं को ब्यूटी पार्लर में तैयार कराया गया और वर-वधुओं को 101 कारों में विवाह स्थल तक लाया गया। शादी के बाद प्रत्येक जोड़े को टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पलंग, अलमारी और रोजमर्रा की जरूरत का सामान उपहार में दिया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य नवविवाहित जोड़ों को आर्थिक परेशानी के बिना अपना नया जीवन शुरू करने में मदद करना था।

Breaking News

मुस्कान और पूजा की हुई शादी 

समारोह में शामिल मुस्कान की उम्र 24 साल है। उसके भाई शाहिद ने बताया कि उनके पिता रिक्शा चलाते हैं और मां पान की दुकान चलाती हैं, ऐसे में परिवार के लिए दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना भी मुश्किल होता है। बहन की शादी के लिए कर्ज लेना पड़ सकता था, लेकिन इस आयोजन से परिवार को बड़ी राहत मिली। शाहिद ने कहा, हमारी बहन की शादी इस समारोह में बड़ी धूमधाम से हो रही है। यह अल्लाह का करम है। वहीं, जमुका गांव की दोनों पैरों से दिव्यांग पूजा की शादी रामनिवास से हुई, जो खुद भी दिव्यांग हैं। दोनों के पास खेती या कमाई का नियमित साधन नहीं है, इसलिए इस आयोजन ने उनके परिवारों की चिंता कम की।

विनय अग्रवाल ने मदद लेने से किया इनकार

सामूहिक विवाह समारोह को सफल बनाने में विनय अग्रवाल की पत्नी श्वेता, भाई कुणाल, भाभी नेहा और मां सरोज अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार के सदस्य विवाह की रस्मों से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक में जुटे रहे। विनय ने बताया कि वह इस आयोजन के लिए किसी से आर्थिक सहयोग नहीं लेते। पहले कुछ लोगों ने मदद की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने उनसे जरूरतमंद बेटियों की शादी कराने में खुद योगदान देने को कहा। शहर के डॉक्टरों और समाजसेवी डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज के अन्य लोगों को ऐसे प्रयास करने चाहिए।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

Latest Posts