कान्हा में टाइगरों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- वैक्सीनेशन के बाद भी कैसे फैला वायरस?

जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में टाइगरों की मौत के मामले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। आवारा कुत्तों के वैक्सीनेशन के बावजूद दो टाइगरों की मौत के मामले में चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि दोनों टाइगरों की मौत कैसे हुई और घटना के बाद क्या कदम उठाए गए? बेंच ने कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे को लेकर भी चिंता जताई और पूछा कि इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
वैक्सीनेशन के बाद भी वायरस की रोकथाम पर सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि कुत्तों का वैक्सीनेशन होने के बावजूद उनमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में केवल वैक्सीनेशन के आधार पर संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से वायरस की रोकथाम और टाइगरों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
दस टाइगरों की मौत का दावा
यह जनहित याचिका मुंबई के चेम्बूर निवासी अधिवक्ता और वन्यजीव प्रेमी सुबित चक्रवर्ती ने दायर की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि 2 अप्रैल से अब तक कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार के कारण दस टाइगरों की मौत हो चुकी है। याचिका में कहा गया है कि टाइगरों को बचाने के लिए सरकार की ओर से अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसी आधार पर मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की मांग
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की गाइडलाइंस के तहत टाइगरों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कमेटी गठित की जाए। याचिका का उद्देश्य मौतों के कारणों की जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुनिश्चित करना है।
सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकार के वकील रहे मौजूद
मामले पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह उपस्थित हुए। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव और केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु ने पक्ष रखा।




















