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Peoples Update Special :बाघ कैसे मरे...सरकार ने संजय डुबरी टाइगर रिजर्व के फील्ड ऑफिसर से मांगा जवाब

मप्र में पहली बार एक साल में करीब 50 बाघ और इतने ही तेंदुओं की मौत हुई है। इससे वन विभाग में हड़कंप है। दो बाघ शावकों की मौत के मामले में संजय डुबरी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर से जवाब मांगा है।
बाघ कैसे मरे...सरकार ने संजय डुबरी टाइगर रिजर्व के फील्ड ऑफिसर से मांगा जवाब
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    संतोष चौधरी, भोपाल। सरकार ने दो बाघ शावकों की मौत के मामले में शुक्रवार को संजय डुबरी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर (एफडी) अमित दुबे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उनसे एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। यहां 6 माह के दौरान आधा दर्जन से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है। उधर, वन विभाग के मुखिया ने सभी क्षेत्रीय, वन्यजीव एवं टाइगर रिजर्व से जुड़े अफसरों को वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा जिस क्षेत्र में घटना होगी, वहां के अधिकारी-कर्मचारी सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का कहना है कि प्रदेश में पहली बार एक साल के दौरान 50 बाघ और इतने ही तेंदुओं की मौत हुई है।

    मॉनिटरिंग में लापरवाही उजागर

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख(पीसीसीएफ हॉफ) वीएन अम्बाड़े ने शुक्रवार को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पहले भी वन्यजीव संरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे, परंतु घटनाओं में कमी नहीं आई। विभाग ने माना है कि कई मामलों में क्षेत्रीय स्तर पर सतर्कता और फील्ड मॉनिटरिंग में लापरवाही उजागर हुई है, जिससे ऐसे हादसे थम नहीं रहे। इसलिए अब अधिकारियों और कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई होगी। वन विभाग ने भी माना है कि  बिजली करंट, सड़क दुर्घटनाओं, रेल दुर्घटनाओं, विषाक्त चारा और शिकार के कारण कई वन्यजीवों की मौत दर्ज हुई है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

    रेलवे और बिजली कंपनियों से संपर्क रखने के निर्देश

    विभागीय अधिकारियों को रेलवे ट्रैक से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखने, ट्रैक के आसपास चेतावनी संकेतक लगाने और रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। साथ ही सभी बिजली कंपनियों से संवाद स्थापित कर करंट लगने वाली घटनाओं को रोकने के लिए तारों की ऊंचाई, इन्सुलेशन और ढीले तारों की मरम्मत पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है।

    वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो

    मध्यप्रदेश में 1973 में टाइगर प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, तब से आज तक यह पहला मौका है, जब एक साल के दौरान करीब 50 बाघ और उसके शावक और इतने ही तेंदुएं की मौत हुई है। अब बाघों की मौतों के लिए संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।      

    अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट,भोपाल

    सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा है

    संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को नोटिस जारी करने के साथ ही अन्य टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरी प्रबंधन को बाघों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने के लिए कहा गया है। कहा कि बिजली कंपनियों और रेलवे के अधिकारियों से समन्वय बनाकर चले।

    वीएन अम्बाड़े, पीसीसीएफ  (हॉफ)

     

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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