इंदौर। स्वच्छता में सात बार नंबर वन रहे इंदौर नगर निगम की साख पर खुद उसके कर्मचारियों ने बट्टा लगा दिया है। निगम मुख्यालय में एक महिला से उसकी आईडी रिकवर करने के बदले ₹400 की रिश्वत ली गई। भ्रष्टाचार का आलम यह रहा कि कर्मचारी ने यह राशि नकद के बजाय ऑनलाइन (पेटीएम) ट्रांसफर करवाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है।
एमआईसी सदस्य ने पकड़ी चोरी
मामले का खुलासा तब हुआ जब एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा (मामा) पीड़ित महिला को लेकर खुद निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने इस भ्रष्टाचार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। एक जनप्रतिनिधि का इस तरह पीड़ित के साथ मोर्चा संभालना निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और निचले स्तर के कर्मचारियों पर अफसरों के ढीले नियंत्रण की पोल खोलता है।
डिजिटल भ्रष्टाचार का 'नया मॉडल'
डिजिटल इंडिया के इस दौर में निगम के गलियारों में भ्रष्टाचार का भी 'डिजिटल मॉडल' सामने आया है। आईडी सुधारने जैसे मामूली काम के लिए मजबूर महिला को परेशान किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पकड़े जाने के डर से ऑनलाइन भुगतान लिया गया। घटना के बाद अब निगम कमिश्नर की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सवालों के घेरे में सिस्टम
वीडियो वायरल होने के बाद शहर में चर्चा है कि क्या केवल निलंबन की कागजी कार्रवाई होगी या भ्रष्ट कर्मचारियों पर ठोस कानूनी एक्शन लिया जाएगा? लोगों का कहना है कि यदि निगम के भीतर बैठे इन 'रिश्वतखोरों' पर लगाम नहीं कसी गई, तो स्वच्छता की रैंकिंग सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।