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वायु प्रदूषण दिमाग के लिए घातक!याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर, जानिए रिसर्च की चेतावनी

वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों ही नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी खतरनाक है। रिसर्च के मुताबिक PM2.5 और PM10 के लंबे संपर्क से याददाश्त, सोचने की क्षमता और फोकस कमजोर होता है। प्रदूषण दिमाग में सूजन और न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाता है। इसका असर बच्चों के IQ पर भी पड़ता है।
याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर, जानिए रिसर्च की चेतावनी
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    दिल्ली और देश के विभिन्न शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़े, आंखों और त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी खतरनाक है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर प्रकाशित रिसर्च बताती है कि छोटे प्रदूषण कण PM2.5 और PM10 के लंबे समय तक संपर्क में रहने से दिमाग की सोचने और याद रखने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

    वायु प्रदूषण से दिमाग में सूजन

    प्रदूषण के कण ब्लड-ब्रेन बैरियर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे दिमाग में सूजन (Neuroinflammation) होती है और न्यूरॉन्स की कनेक्टिविटी कम हो जाती है। रिसर्च में पाया गया कि ज्यादा प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों में अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरा ज्यादा होता है। वायु प्रदूषण से दिमाग में बीटा-एमाइलॉइड प्लाक बढ़ता है, जो अल्जाइमर का कारण बनता है।

    बच्चों के IQ और दिमाग पर असर

    गर्भावस्था और जन्म के बाद प्रदूषित हवा में बच्चों का IQ कम हो सकता है। ऐसे बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, याददाश्त कमजोर होना और सीखने की क्षमता घट जाना आम है। जन्म के बाद के पहले 5 साल दिमाग के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए प्रदूषण का असर स्थायी हो सकता है। शहरी युवाओं में ब्रेन फॉग की समस्या भी अक्सर इसी कारण देखी जाती है।

    वायु प्रदूषण दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाता है

    ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस : प्रदूषक तत्व फ्री रेडिकल्स बढ़ाते हैं, जिससे न्यूरॉन्स डैमेज होते हैं।

    दिमाग में सूजन (Neuroinflammation) : कोशिकाओं में सूजन याददाश्त कमजोर करती है।

    ऑक्सीजन की कमी : कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें ऑक्सीजन सप्लाई कम कर देती हैं, जिससे एकाग्रता घटती है।

    वायु प्रदूषण से याददाश्त कमजोर होने के लक्षण

    • छोटी-छोटी बातें भूल जाना
    • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
    • मानसिक थकान
    • फोकस करने में दिक्कत

    यदि ये लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और इलाज करवाएं।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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