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Economic Survey 2026 :‘सोया स्टेट’की दौड़ में महाराष्ट्र नंबर वन, राहत की बात मप्र अब भी ‘प्रोटीन कैपिटल’ 

संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, सोयाबीन उत्पादन में महाराष्ट पहले नंबर पर पहुंच गया है। वहीं 'प्रोटीन कैपिटल' के रूप में मप्र का नाम बरकरार है।
‘सोया स्टेट’की दौड़ में महाराष्ट्र नंबर वन, राहत की बात मप्र अब भी ‘प्रोटीन कैपिटल’ 
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मनीष दीक्षित, भोपाल। लगता है मप्र और महाराष्ट्र के बीच सोयाबीन उत्पादन को लेकर तगड़ा मुकाबला चल रहा है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र से खोया हुआ ‘सोया स्टेट’ का दर्जा वापस मिलने के बाद एक बार फिर यह तमगा हमारा नहीं रहा, क्योंकि सोयाबीन उत्पादन में पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र हमसे आगे निकल गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि सोयाबीन उत्पादन में मप्र फिर दूसरे नंबर पर आ गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, चने के उत्पादन में भी महाराष्ट्र आगे निकल गया है और मप्र दूसरे नंबर पर आ गया है। जाहिर है इसमें मौसम और अन्य कारक शामिल होंगे। 2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश पहली पायदान पर था। खुशी की बात यह है कि मप्र ‘प्रोटीन कैपिटल’ का दर्जा बरकरार रखते हुए देश में सबसे अधिक दलहन उत्पादन वाला राज्य बना हुआ है। यानी देशभर के वेजिटेरियन लोगों के प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति में मप्र सबसे अधिक योगदान दे रहा है।

    मक्का उत्पादन में मप्र पहले स्थान पर

    दरअसल, मप्र को वर्षों से सोयाबीन राज्य का दर्जा प्राप्त है। यहां कृषि क्षेत्र में बदलाव और किसानों की समृद्धि में इसका बड़ा योगदान है। पिछले कुछ वर्षों से बढ़ती लागत और कम उत्पादन के कारण किसानों का इससे मोहभंग हो रहा है। सिंचाई की उपलब्धता के चलते अब प्रदेश के किसान खासकर कैश क्रॉप्स में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। मक्का उत्पादन में मप्र, देश में पहले और तिलहन उत्पादन में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मप्र की जीडीपी में लगभग 1, 28,000 करोड़ और प्रति व्यक्ति आय में करीब 13,000 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।  

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    सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों में सुधार की जरूरत

    प्रदेश को सामाजिक और आर्थिक सूचकांको में अपना स्तर सुधारने के लिए और काम करने की जरूरत है। राज्य सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदेश में मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। हालांकि शिशु मृत्यु दर में कुछ कमी आई है, लेकिन यह अभी भी अधिक है। परिवार नियोजन के लिए कई अभियान चलाने के बावजूद प्रदेश में जन्म दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। जन्म दर का राष्ट्रीय औसत 18.4 है, जबकि प्रदेश में यह 22.5  प्रति हजार है। प्रजनन दर भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है और केवल बिहार और उप्र से कम है।

    केरल वालों से साढ़े सात साल कम जीते है मप्र के लोग 

    मप्र में औसत आयु देश की औसत आयु से लगभग ढाई वर्ष और केरल में रहने वालों से 7.5 वर्ष कम है। औसत आयु के मामले में भारत में यह आंकड़ा 70.3 साल है। देश में सबसे अधिक औसत आयु 75.1 के साथ केरल पहले स्थान पर है। मध्यप्रदेश में औसत आयु महज 67.6 वर्ष है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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