संजय दुबे, जबलपुर। उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी और उनसे जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए विकसित ‘गज रक्षक’ माबाइल ऐप मानव-हाथी संघर्ष रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस ऐप की मदद से अक्टूबर 2025 से अब तक एक दर्जन मामलों में हाथी और मानव के बीच संघर्ष रोकने में मदद मिल चुकी है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय बताते हैं, यह ऐप इंटरनेट न होने पर भी एसएमएस, वॉइस कॉल और ऑफलाइन डेटा सिंकिंग के जरिए काम करता है। हम चाहते हैं कि इंसान और हाथी दोनों सुरक्षित रहें। अब तक लगभग 100 फील्ड स्टाफ को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है और यह प्रक्रिया जारी है। यह ऐप 10 किमी के दायरे में हाथियों की लोकेशन, मूवमेंट और व्यवहार की जानकारी देता है। गांवों के पास हाथी आने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है, जिससे लोग सतर्क हो जाते हैं।
इस ऐप में ऑफलाइन डेटा फीड किया जाता है। हाथी कहीं भी दिखाई देने पर, ऐप खुल जाता और फोटो ले लेता है। मोबाइल नेटवर्क में आने पर यह सर्वर और स्टाफ के अन्य मोबाइल पर कम्यूनिकेट कर देता है। सहाय के अनुसार, सामान्य तौर पर गांव के पास नेटवर्क मिल ही जाता है, ऐसी स्थिति में हाथी की लोकेशन तत्काल मिल जाती है। कोर एरिया में जहां नेटवर्क नहीं होता है, तो वहां फील्ड अधिकारी द्वारा ऑफलाइन जानकारी एकत्र की जाती है।
2018 में 40 हाथियों का झुंड बांधवगढ़ क्षेत्र में आया था, जो स्थायी रूप से यहीं बस गया। अब इनकी संख्या 65 हो गई है। 'गज रक्षक' ऐप मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 जुलाई 2025 को भोपाल में लॉन्च किया था। इसे मुख्य रूप से बांधवगढ़ में हाथियों की लाइव लोकेशन ट्रैक करने और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए विकसित किया गया है।
अक्टूबर 2025 : पनपथा रेंज में हाथियों के आने की लोकेशन ऐप के माध्यम से मिली। रेंज अधिकारियों ने ऐप के जरिए इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। इससे ग्रामीण सतर्क हो गए और वन अमले ने हाथियों के झुंड को जंगल की ओर खदेड़ दिया। इससे हाथियों से होने वाले नुकसान को रोका जा सका।
नवंबर 2025 : मानपुर रेंज के दो हाथी छपरवाह गांव की ओर बढ़ते दिखे। फील्ड स्टाफ ने ऐप के माध्यम से मानपुर रेंज को सूचना भेजी। रेंज अधिकारियों ने तत्काल प्रशिक्षित हाथियों के माध्यम से दोनों जंगली हाथियों को वन क्षेत्र की ओर डायवर्ट कर दिया।
दिसंबर 2025 : ग्राम पंचायत सरमनिया के ग्राम रोहनिया में चार हाथियों के झुंड के आने की सूचना वन कर्मियों को ऐप के माध्यम से मिली थी। वन अमले ने इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। इससे ग्रामीण सतर्क हो गए। इसके बाद वन अमले ने हाथियों को जंगल की ओर डायवर्ट कर दिया।