Naresh Bhagoria
30 Jan 2026
इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी ने शुक्रवार को एक और बुजुर्ग की जान ले ली। मृतक 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी थे। इस ताजा मौत के बाद क्षेत्र में इस बीमारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। पिछले एक महीने से जारी इस स्वास्थ्य संकट ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है।
परिजनों के अनुसार एकनाथ सूर्यवंशी को 29 दिसंबर 2025 को उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायत के बाद शैल्बी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार नहीं होने पर 3 जनवरी 2026 को उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। अगले ही दिन, 4 जनवरी को उनकी स्थिति और बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया। करीब 30 दिनों तक चले इलाज के दौरान एकनाथ सूर्यवंशी 25 दिनों से अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रहे। गुरुवार शाम को परिजनों की सहमति से उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर ले जाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई।
चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी से फैली बीमारी के कारण एकनाथ सूर्यवंशी की दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी थीं, लिवर भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके अलावा संक्रमण का असर हृदय और मस्तिष्क तक पहुंच गया था। डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी से ग्रसित अधिकांश मरीजों में मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति देखने को मिली है। गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचकर भागीरथपुरा के मरीजों से मिले थे। इसी दौरान उन्होंने एकनाथ सूर्यवंशी के बेटे से भी बातचीत कर उनका हालचाल जाना था।
एकनाथ सूर्यवंशी जल संसाधन विभाग में वर्ष 1983 से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहे। लंबे संघर्ष के बाद उन्हें नियमित किया गया, लेकिन उस समय भी उनका वेतन लगभग 18 हजार रुपए ही था। पेंशन और अन्य सेवा लाभ न मिलने को लेकर उनका मामला वर्तमान में हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उनकी पत्नी शकुंतला (63) हृदय रोग से पीड़ित हैं, जबकि परिवार की दो बहनों की शादी हो चुकी है। इसी क्षेत्र में 21 जनवरी को 51 वर्षीय हेमंत गायकवाड़ की भी दूषित पानी से मौत हो चुकी है। फिलहाल उनकी पत्नी की हालत गंभीर बनी हुई है और किडनी संबंधी परेशानी के चलते उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक भागीरथपुरा दूषित पानी प्रकरण में अब तक 450 से अधिक मरीजों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। वर्तमान में चार मरीज अभी भी भर्ती हैं, जिनमें से तीन बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में और एक अरविंदो हॉस्पिटल में उपचाराधीन है। इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 24 घंटे संचालित किया जा रहा है और आपात स्थिति के लिए दो एम्बुलेंस तैनात हैं। हालांकि इन दिनों डायरिया के केवल एक-दो हल्के मामले ही सामने आ रहे हैं, लेकिन हालात में सुधार के बावजूद क्षेत्र के रहवासियों में डर और चिंता अब भी बनी हुई है।