अब 100% एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां, केंद्र सरकार ने E100 फ्यूल को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने देश में 100 प्रतिशत एथेनॉल यानी E100 फ्यूल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए नियमों में बदलाव किया है। 26 अक्टूबर को जारी नए गजट नोटिफिकेशन के तहत सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन किया गया है। इसके बाद उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों में E85 के साथ E100 ईंधन को भी शामिल कर लिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य ऐसे वाहनों को नियामकीय मान्यता देना है, जिन्हें अधिक मात्रा में एथेनॉल वाले ईंधन पर चलने के लिए खास तौर पर तैयार और प्रमाणित किया गया हो। हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल या E20 पर चलने वाली कारों में सीधे E85 या E100 फ्यूल भरा जा सकता है। इन ईंधनों का इस्तेमाल केवल उन वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें इनके अनुरूप डिजाइन और सर्टिफाइड किया गया हो।
सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में किया बदलाव
सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स के नियम 115 और संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया है। नए नोटिफिकेशन में उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों के तहत E85 के साथ E100 को भी शामिल किया गया है। इस बदलाव से 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन पर चलने के लिए तैयार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को नियमों के दायरे में स्पष्ट मान्यता मिलती है। ऐसे वाहनों के लिए लागू तकनीकी और उत्सर्जन संबंधी शर्तों का पालन करना जरूरी होगा।
क्या होता है E100 फ्यूल?
E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग 100 प्रतिशत एथेनॉल होता है और पेट्रोल की मिलावट नहीं होती। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ने, मक्का और अन्य जैविक स्रोतों से तैयार किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल वाहनों के ईंधन के रूप में किया जाता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के अलग-अलग स्तर होते हैं। उदाहरण के लिए, E20 में लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और शेष हिस्सा मुख्य रूप से पेट्रोल होता है। वहीं, E85 में एथेनॉल की मात्रा लगभग 85 प्रतिशत होती है। E100 में एथेनॉल की मात्रा लगभग 100 प्रतिशत होती है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन क्या होते हैं?
फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल यानी FFV ऐसे वाहन होते हैं, जिन्हें एक से अधिक अनुपात में एथेनॉल और पेट्रोल वाले ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किया जाता है। इनके इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन के अनुरूप तैयार किया जाता है। E85 या E100 जैसे ईंधन के लिए वाहन में उपयुक्त तकनीक और प्रमाणन जरूरी है। केवल पेट्रोल इंजन होने से कोई कार अपने आप फ्लेक्स-फ्यूल वाहन नहीं बन जाती।
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क्या मौजूदा पेट्रोल कार में E100 डलवा सकते हैं?
सरकार के नियमों में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि हर पेट्रोल कार अब E100 पर चल सकती है। सामान्य पेट्रोल या E20 के लिए डिजाइन की गई गाड़ियों में E85 या E100 का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जब तक वाहन निर्माता ने उस मॉडल को संबंधित ईंधन के लिए उपयुक्त और प्रमाणित न किया हो। गलत ईंधन के इस्तेमाल से इंजन, फ्यूल सिस्टम और वाहन के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी कार की मैन्युअल बुक, निर्माता के निर्देश और ईंधन संबंधी प्रमाणन की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
पुरानी गाड़ियों में बदलाव की जरूरत नहीं
नए नियमों के कारण मौजूदा पेट्रोल या E20 वाहनों के मालिकों को अपनी गाड़ियों में बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। यह संशोधन मुख्य रूप से उन वाहनों से संबंधित है, जिन्हें E85 या E100 जैसे उच्च एथेनॉल वाले ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। इसलिए सामान्य पेट्रोल कार चलाने वाले लोगों को केवल इस नोटिफिकेशन के आधार पर अपनी गाड़ी में कोई तकनीकी बदलाव कराने की जरूरत नहीं है।
भारत में एथेनॉल ईंधन को लेकर अहम है यह बदलाव
एथेनॉल गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से जीवाश्म ईंधन की जरूरत कम करने और कृषि आधारित ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देने की संभावना रहती है।



















