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Dussehra 2025 : बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व, जानें रावण दहन का मुहूर्त

Dussehra 2025 : बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व, जानें रावण दहन का मुहूर्त
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    धर्म डेस्क। 2 अक्टूबर 2025 को पूरे देश में दशहरा यानी विजयादशमी उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। दशहरे का सबसे प्रसिद्ध स्वरूप भगवान राम और रावण के युद्ध की कथा से जुड़ा है। रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध किया और तभी से यह पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई।

    दशहरा 2025 की तिथि और पंचांग

    तिथि: शुक्ल दशमी

    मास: अश्विन

    दिन: गुरुवार

    समय: दशमी तिथि आज शाम 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगी

    सूर्योदय: सुबह 6:15 बजे

    सूर्यास्त: शाम 6:06 बजे

    चंद्रमा उदय: दोपहर 3:09 बजे

    चंद्रास्त: 3 अक्टूबर, प्रातः 1:56 बजे

    सूर्य राशि: कन्या

    चंद्र राशि: धनु

    शुभ समय: अभिजीत मुहूर्त- 11:46 से 12:34 बजे

    अमृत काल: 3 अक्टूबर, रात्रि 11:01 से 12:38 बजे

    दशहरा 2025 का रावण दहन मुहूर्त

    दशहरा के दिन रावण दहन हमेशा प्रदोष काल में किया जाता है। आज सूर्यास्त शाम 6:06 बजे होगा और इसी समय से रावण का दहन शुरू होगा। यह हमें यह संदेश देता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है।

    दशहरा 2025 की पूजा विधि

    • सुबह स्नान करके गेहूं या चूने से दशहरा की प्रतिमा बनाएं।
    • गाय के गोबर से नौ गोले बनाएं और उन पर जौ और दही लगाएं।
    • भगवान राम की झांकियों पर जौ चढ़ाएं।
    • दो कटोरियां बनाएं – एक में सिक्के और दूसरी में रोली, चावल, फल, फूल और जौ रखें।
    • प्रतिमा पर केले, मूली, ग्वारफली, गुड़ और चावल चढ़ाएं।
    • धूप-दीप जलाएं और घर के बड़े लोगों का आशीर्वाद लें।

    दशहरा 2025 के उपाय

    सुख और समृद्धि के लिए:

    घर में शमी के पौधे की पूजा करें और पौधे के नीचे घी का दीपक जलाएं।

    आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए:

    सुंदरकांड या श्रीरामचरितमानस का पाठ करें। यह मानसिक शांति और धीरे-धीरे आर्थिक सुधार लाने में मदद करता है।

    दशहरा का महत्व

    दशहरा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं है बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। यह हमें धैर्य, साहस और धर्म की रक्षा का महत्व सिखाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है – कहीं रामलीला का मंचन होता है, तो कहीं दुर्गा पूजा का समापन इसी दिन होता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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