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Margashirsha Amavasya 2025 :एक दिन, अनेक पुण्य! क्या है मार्गशीर्ष अमावस्या का धार्मिक महत्व? जानें अगहन का आध्यात्मिक रहस्य

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। अगहन मास में पड़ने वाली यह अमावस्या पितृ-तर्पण, दान, जप और लक्ष्मी-नारायण पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। शास्त्रों में मार्गशीर्ष को सबसे पवित्र महीनों में स्थान दिया गया है। जानें इस दिवस का धार्मिक महत्व, करने योग्य उपाय और इससे मिलने वाले शुभ फल।
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एक दिन, अनेक पुण्य! क्या है मार्गशीर्ष अमावस्या का धार्मिक महत्व? जानें अगहन का आध्यात्मिक रहस्य
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस वर्ष मार्गशीर्ष अमावस्या 19 नवंबर 2025 को सुबह 09:43 से प्रारंभ होकर 20 नवंबर 2025 दोपहर 12:16 बजे तक रहेगी। यह दिन विशेष रूप से पितृ-तर्पण, दान, जप और लक्ष्मी-पूजा के लिए फलदायी माना गया है। शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं मार्गशीर्ष मास को सबसे श्रेष्ठ महीनों में स्थान दिया है।

    मार्गशीर्ष अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

    पितृकर्म में श्रेष्ठ

    अमावस्या तिथि पितरों की आत्मा को शांति देने के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और दीपदान करने से पितरों को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। श्रद्धा से पितृकर्म करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    लक्ष्मी नारायण पूजा का महत्व

    मार्गशीर्ष अमावस्या पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से परिवार में समृद्धि, सौभाग्य और धन वृद्धि होती है। दान विशेष रूप से अन्न, वस्त्र, तिल और दीपदान पुण्यदायी माना गया है।

    मार्गशीर्ष मास को क्यों माना गया सर्वश्रेष्ठ?

    • मार्गशीर्ष मास का नाम मृगशिरा नक्षत्र पर आधारित है।
    • इस मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में स्थित रहता है।
    • शास्त्रों में यह मास साधना, तपस्या और पवित्रता का माना गया है।
    • इस मास में जप, ध्यान, यज्ञ और दान करना विशेष रूप से शुभ होता है।
    • मार्गशीर्ष मास में घटित महत्वपूर्ण धार्मिक घटनाओं में गीता जयंती भी शामिल है।

    मार्गशीर्ष अमावस्या पर किए जाने वाले धार्मिक कार्य

    • प्रातःकाल स्नान कर मन और शरीर को शुद्ध करें।
    • तिल मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
    • पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और दीपदान करें।
    • संध्या समय घर की उत्तर दिशा में दीप जलाएं।
    • काले तिल, गुड़, अन्न और गर्म वस्त्र का दान करें।
    • गाय, कुत्ते और पक्षियों को भोजन कराएं।
    • ॐ पितृदेवाय नमः का जप करें।
    • शाम को घर में शांति पाठ या सरल मंत्र-जप करना अत्यंत फलदायी होता है।
    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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