भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाई जाती है दिवाली? कहीं काली पूजा तो कहीं दीपदान की परंपरा

दिवाली का त्योहार पूरे देश में रोशनी, खुशियों और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के हर राज्य में दिवाली मनाने का अंदाज एक जैसा नहीं है? कहीं मां काली की पूजा होती है, तो कहीं पूर्वजों को याद किया जाता है। वहीं, कुछ जगहों पर इस दिन नए साल की शुरुआत भी मानी जाती है। आइए जानते हैं देश के अलग-अलग राज्यों में दिवाली से जुड़ी खास परंपराएं।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली
उत्तर प्रदेश में दिवाली भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है। अयोध्या में इस अवसर पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें लाखों दीये जलाए जाते हैं। घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लोग मिठाइयां बांटते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। दिल्ली में भी घरों, बाजारों और मंदिरों को रोशनी से सजाया जाता है।
पंजाब
पंजाब में दिवाली के दिन को सिख समुदाय बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। मान्यता है कि सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी इसी दिन ग्वालियर किले से 52 राजाओं के साथ रिहा होकर अमृतसर पहुंचे थे। इस अवसर पर स्वर्ण मंदिर को रोशनी से सजाया जाता है और दीप जलाए जाते हैं। गुरुद्वारों में विशेष आयोजन भी होते हैं।
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में दिवाली की रात मां लक्ष्मी के बजाय मां काली की पूजा का विशेष महत्व है। इसे काली पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर जगह-जगह भव्य पंडाल बनाए जाते हैं और मां काली की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। श्रद्धालु रातभर मां की आराधना करते हैं। असम में भी दिवाली के अवसर पर काली पूजा की परंपरा प्रचलित है।
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तमिलनाडु और दक्षिण भारत
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दिवाली को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। इस अवसर पर लोग सूर्योदय से पहले उठकर तेल स्नान करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और पूजा करते हैं। घरों के बाहर कोलम यानी पारंपरिक रंगोली बनाई जाती है। इसके बाद परिवार के लोग मिलकर पकवानों का आनंद लेते हैं।
गोवा और महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में दिवाली की शुरुआत वसुबारस से होती है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। इसके अलावा घरों के दरवाजों पर तोरण लगाए जाते हैं और रंगोली बनाई जाती है। दिवाली के दौरान यहां चकली, करंजी और लड्डू जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।
गोवा में दिवाली पर नरकासुर के पुतले जलाने की खास परंपरा है। दिवाली से एक रात पहले बड़े-बड़े नरकासुर के पुतले बनाए जाते हैं और सुबह उन्हें जलाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
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गुजरात
गुजरात में दिवाली का त्योहार नए साल की शुरुआत से भी जुड़ा हुआ है। यहां दिवाली के अगले दिन गुजराती नववर्ष मनाया जाता है। व्यापारी इस अवसर पर अपने नए बही-खातों की पूजा करते हैं, जिसे चोपड़ा पूजन कहा जाता है। घरों के बाहर रंगोली बनाई जाती है और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए उनके पदचिह्न बनाए जाते हैं।
ओडिशा
ओडिशा में दिवाली के दौरान बड़ बड़ुआ डाका की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके सम्मान में दीप जलाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।
बिहार
बिहार में दिवाली का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों को दीयों और रंगोली से सजाया जाता है। यहां दिवाली पर घरौंदा बनाने की भी खास परंपरा है। बच्चे मिट्टी से छोटे-छोटे घर बनाते हैं और उन्हें सजाते हैं। इसे सुख-समृद्धि और खुशहाल परिवार का प्रतीक माना जाता है।
नॉर्थ ईस्ट के राज्य
पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों में दिवाली की अपनी खास परंपराएं हैं। असम में मां काली की पूजा का विशेष महत्व है, जबकि सिक्किम में दिवाली के आसपास तिहार का त्योहार मनाया जाता है। तिहार में पशुओं और प्रकृति से जुड़े रिश्तों का सम्मान किया जाता है। इस दौरान घरों को सजाया जाता है और दीप जलाए जाते हैं।
हर राज्य में अलग परंपरा, लेकिन संदेश एक
भारत में दिवाली मनाने के तरीके भले ही अलग-अलग हों, लेकिन इस त्योहार का मूल संदेश एक ही है- अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत। यही वजह है कि देश के हर कोने में दिवाली लोगों को खुशियों, एकता और नई शुरुआत का संदेश देती है।




















