दौसा हादसे ने उजाड़ दिए परिवार:आज होगा अंतिम संस्कार; प्रत्यक्षदर्शी बोली- आंखों के सामने जिंदा जलता रहा चालक

इंदौर। राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस हादसे की भयावह तस्वीरें अब भी पीड़ित परिवारों का पीछा नहीं छोड़ रही हैं। हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के शव इस कदर जल चुके थे कि परिजनों को पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लेना पड़ा। जांच पूरी होने के बाद स्वजनों को शवों की जगह केवल अस्थियां सौंपी गईं। इंदौर की दो मृतक महिलाओं के पार्थिव अवशेष देर शाम दौसा से रवाना किए गए, जिनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा।
मंगलवार रात हंस ट्रेवल्स की स्लीपर बस (आरजे-11 डी-6565) दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक ट्राले से टकराने के बाद आग का गोला बन गई थी। इस भीषण हादसे में इंदौर के अन्नपूर्णा क्षेत्र निवासी निर्मला गुप्ता और बजरंग नगर निवासी भूमि भोर की दर्दनाक मौत हो गई थी।
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निर्मला गुप्ता अपने पति चंद्रप्रकाश गुप्ता के साथ चारधाम यात्रा से लौट रही थीं। हादसे की सूचना मिलने के बाद उनकी बेटी दीपश्री, जो अपर कलेक्टर हैं, अन्य परिजनों के साथ दौसा पहुंचीं। वहीं भूमि भोर के पिता भारत भोर और भाई जितेंद्र भी शव की पहचान के लिए दौसा पहुंचे। डीएनए जांच पूरी होने के बाद दोनों परिवारों को पार्थिव अवशेष सौंपे गए।
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भूमि के भाई जितेंद्र ने बताया कि शव पूरी तरह जल चुका था और उन्हें केवल अस्थियां ही मिलीं। परिवार पूरे दिन शव के इंदौर पहुंचने का इंतजार करता रहा, लेकिन कानूनी प्रक्रिया और औपचारिकताओं के कारण देर शाम रवाना होने से शव गुरुवार रात तक नहीं पहुंच सके। इसके चलते अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा।
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'चालक सामने ही जिंदा जल रहा था, मदद की गुहार लगाता रहा'
हादसे में घायल विजय नगर निवासी लीजा अब भी सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बस सामान्य गति से चल रही थी, लेकिन रास्ते में चालक बदलने के बाद बस तेज रफ्तार से दौड़ाई जाने लगी। यात्रियों ने चालक से धीमे चलने का आग्रह किया, लेकिन उसने अभद्र व्यवहार किया।
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लीजा के अनुसार अधिकांश यात्री सो रहे थे कि अचानक जोरदार धमाका हुआ और सभी सीटों से उछल पड़े। उनकी सहेली भूमि सीट में फंस गई थी। उन्होंने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, गाल थपथपाए, लेकिन उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस दौरान बस में तेजी से धुआं भरने लगा और आग फैलती चली गई। जान बचाने के लिए यात्रियों को मजबूरन बस से बाहर कूदना पड़ा।उन्होंने बताया कि चालक उनकी आंखों के सामने आग की लपटों में घिर गया था और लगातार मदद की गुहार लगा रहा था, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि कोई उसकी सहायता नहीं कर सका। कुछ ही मिनटों में पूरी बस आग की चपेट में आ गई।
घायल यात्रियों का उपचार जारी
हादसे में घायल स्वानंद की कमर और दाहिने पैर में फ्रैक्चर हुआ है, जबकि दिशा का भी अस्पताल में उपचार जारी है। लीजा ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले एंबुलेंस को फोन किया था, लेकिन लोकेशन स्पष्ट नहीं होने के कारण राहत दल को मौके पर पहुंचने में काफी देर लगी। उनका आरोप है कि एंबुलेंस पहुंचने के बाद भी व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी।












