Janjgir Champa:नाग पंचमी पर जांजगीर में दिखी अनोखी परंपरा,नंगमत में सांप बने लोग

प्रेम कुमार रायपुर/जांजगीर: नाग पंचमी के मौके पर जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय की पुरानी बस्ती में एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। ढोल-मांदर की थाप के बीच आयोजित नंगमत में कुछ लोग सांप जैसी गतिविधियां करते नजर आए। बैगाओं द्वारा मंत्रोच्चार के बाद उन्हें सामान्य अवस्था में लाने की रस्म निभाई गई। स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसका संबंध गुरु से प्राप्त पारंपरिक मंत्रों को जीवित रखने से है।
जांजगीर में नाग पंचमी पर अनोखा नजारा
जांजगीर-चांपा जिले में नाग पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जिला मुख्यालय की पुरानी बस्ती में शाम होते ही ढोल, झांझ, मजीरा और मांदर की थाप गूंजने लगी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मौके पर पहुंच गए। इसी बीच शुरू हुआ वर्षों पुरानी परंपरा 'नंगमत' का आयोजन, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

यह भी पढ़ें: Raipur: नकटी प्रभावितों के न्याय की लड़ाई तेज, कांग्रेस का बड़ा ऐलान, पहले विधायक अनुज शर्मा के बंगले का होगा घेराव
अखाड़े में उतरे युवक, देखते ही देखते बने 'सांप'
नंगमत के दौरान युवा और बुजुर्ग अखाड़े में पहुंचे। परंपरा के अनुसार कुछ लोग सांप की तरह हरकत करते हुए जमीन और कीचड़ में लोटने लगे। मौके पर मौजूद बैगाओं द्वारा मंत्रोच्चार किए जाने के बाद उन्हें नियंत्रित करने और सामान्य अवस्था में लाने की रस्म निभाई गई।

मंत्रों के जरिए सर्प वश की मान्यता
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार कहरा समाज समेत क्षेत्र के कई समाजों के लोगों ने अपने-अपने गुरुओं से बैगाई की दीक्षा ली है। नाग पंचमी के अवसर पर इन पारंपरिक मंत्रों का सामूहिक रूप से पाठ किया जाता है। मान्यता है कि इसी दौरान गुरु से प्राप्त मंत्रों को दोहराकर उन्हें आगे भी जीवित रखने की परंपरा निभाई जाती है।

कान में मंत्र, फिर बदलने लगी चाल-ढाल
परंपरा के अनुसार बैगाओं का समूह एक व्यक्ति के कान में मंत्रों का उच्चारण करता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति अपनी सुध-बुध खोकर सांप जैसी गतिविधियां करने लगता है। वह जमीन और कीचड़ में लोटने लगता है। कुछ समय बाद बैगा फिर उसके कान में मंत्र पढ़ते हैं और दूध-लाई खिलाकर उसे सामान्य अवस्था में लाने की रस्म पूरी करते हैं।

यह भी पढ़ें: Raipur: भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में छत्तीसगढ़ का दबदबा,रूप कुमारी चौधरी और दीपक म्हस्के को बड़ी जिम्मेदारी
बैगाओं की परंपरा और बदलता दौर
पार्षद गुड्डू कहरा के मुताबिक पुराने समय में सर्पदंश होने पर लोग उपचार के लिए बैगाओं के पास जाते थे और उनके झाड़-फूंक पर भरोसा करते थे। लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान के विकास के साथ सर्पदंश का उपचार अस्पतालों में उपलब्ध है। ऐसे में बैगा अब सर्पदंश के इलाज के लिए झाड़-फूंक की सलाह नहीं देते।
मंत्रों को जीवित रखने के लिए हर साल नंगमत
आयोजकों के अनुसार अब नंगमत का उद्देश्य सर्पदंश का उपचार करना नहीं, बल्कि गुरु परंपरा से मिले मंत्रों को याद रखने और परंपरा को आगे बढ़ाने से जुड़ा है। नाग पंचमी पर हर वर्ष इसका आयोजन कर मंत्रों का सामूहिक पाठ किया जाता है।
यह भी पढ़ें: Raipur: रायपुर में महिला की रेप के बाद हत्या, शव से भी दुष्कर्म की कोशिश का आरोप, आरोपी गिरफ्तार
परंपरा या आस्था? चर्चा का विषय बना नंगमत
जांजगीर की पुरानी बस्ती में हुए इस आयोजन ने लोगों को आकर्षित किया। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ी अलग-अलग धारणाएं हैं। इस आयोजन का उद्देश्य किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि स्थानीय परंपरा और सांस्कृतिक मान्यता के रूप में इसे देखा जा रहा है।












