सावन के तीसरे सोमवार को कुबेरेश्वरधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, डेढ़ लाख शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक

सीहोर। सावन के तीसरे सोमवार को विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र कुबेरेश्वरधाम में भक्ति, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। सुबह से ही सीवन नदी के तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक शिवभक्तों का सैलाब उमड़ता रहा। डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने धाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। बारिश की बूंदों के बीच भी कांवड़ियों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा।
11 किलोमीटर तक दिखाई दिया आस्था का सैलाब
सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक करीब 11 किलोमीटर का मार्ग सोमवार को पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। हाथों में कांवड़, कंधों पर भगवा ध्वज और जुबां पर भगवान शिव के जयकारों के साथ महिला, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालु पैदल धाम की ओर बढ़ते रहे। बारिश के बावजूद भक्तों के कदम नहीं रुके। कई स्थानों पर कांवड़ियों के समूह भजन-कीर्तन और जयघोष करते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए।

सीवन नदी से जल लेकर पहुंच रहे शिवभक्त
सावन मास में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीहोर की जीवनदायिनी सीवन नदी से जल लेकर पैदल कुबेरेश्वरधाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की यह आस्था केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और विश्वास की जीवंत तस्वीर बन गई है। सोमवार को भी बड़ी संख्या में कांवड़ियों ने सीवन नदी से जल उठाया और करीब 11 किलोमीटर पैदल यात्रा कर धाम पहुंचकर भगवान शिव का अभिषेक किया।
सेवा पंडालों में श्रद्धालुओं का स्वागत
कांवड़ यात्रियों की सुविधा और सेवा के लिए सीवन नदी से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने सेवा केंद्र बनाए हैं। इन केंद्रों पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, फलाहार, चाय और प्रसादी की व्यवस्था की जा रही है। सेवादार बारिश और भीड़ की परवाह किए बिना श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे। जगह-जगह सेवा पंडालों में शिवभक्तों का आत्मीय स्वागत किया गया।
भगवान भाव के भूखे, दिखावे की जरूरत नहीं
सोमवार को कुबेरेश्वरधाम पहुंचे कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति में दिखावे और आडंबर की आवश्यकता नहीं है। भगवान भाव के भूखे हैं और सच्चे मन से की गई भक्ति ही सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में चरित्र, ज्ञान और व्यवहार का विशेष महत्व है। इन तीनों की नकल कोई नहीं कर सकता। व्यक्ति का चरित्र उसके कर्मों, ज्ञान उसके आचरण और व्यवहार उसके संस्कारों से दिखाई देता है।
25 अगस्त को फिर निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार को सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। आगामी 25 अगस्त को भी भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी, जिसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

100 से अधिक स्थानों पर होगी सेवा
मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि 25 अगस्त की कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की सेवा के लिए 100 से अधिक स्थानों पर सेवा केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों पर पेयजल, फलाहार, चाय, प्रसादी सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सामाजिक और धार्मिक संगठनों के सेवादार पूरे सेवाभाव के साथ कांवड़ियों की सहायता करेंगे। प्रशासन और सेवा संगठनों द्वारा भी श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
भगवा ध्वजों और जयघोष से गूंजा पूरा क्षेत्र
सावन के तीसरे सोमवार को सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक का पूरा मार्ग मानो भगवान शिव की भक्ति में डूब गया। सड़क किनारे लहराते भगवा ध्वज, जगह-जगह लगे सेवा पंडाल, कांवड़ियों के जत्थे और हर-हर महादेव के जयघोष ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। हजारों कदमों ने यह संदेश दिया कि जब मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो तो कठिन रास्ते भी भक्ति की राह बन जाते हैं।












