CJI-NALSAR विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, छात्रों पर कार्रवाई वाले BCI के नोटिफिकेशन रद्द

नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद में आयोजित दीक्षांत समारोह से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR के छात्रों के खिलाफ जारी BCI के दोनों नोटिफिकेशन रद्द कर दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित शिक्षण संस्थान के पास होता है। छात्र जब तक वकील के रूप में नामांकित नहीं हो जाते, तब तक उनके व्यवहार को लेकर कार्रवाई करने का अधिकार BCI के पास नहीं है।
छात्रों के व्यवहार को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। ऐसे मामलों में संस्थान अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में अपने पहले के रुख को भी जारी रखा। कोर्ट ने BCI और राज्य बार काउंसिलों को छात्रों या फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने वाले आदेश को बरकरार रखा है।
14 अगस्त की सुनवाई में भी कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
इस मामले की पहले 14 अगस्त को भी सुनवाई हुई थी। उस समय CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि यदि छात्र भारत के मुख्य न्यायाधीश का विरोध कर रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने का अधिकार है। कोर्ट ने उस समय भी कहा था कि इस मामले में BCI को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार विरोध या असहमति के आधार पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
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दीक्षांत समारोह में विरोध के बाद बढ़ा था विवाद
विवाद की शुरुआत NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह से हुई। विश्वविद्यालय के दीक्षांत कार्यक्रमों में भारत के मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी की परंपरा रही है। इस बार कुछ छात्रों ने CJI सूर्यकांत की मौजूदगी का विरोध किया था। इसके बाद मनन कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कड़ा नोटिफिकेशन जारी किया था। नोटिफिकेशन में कहा गया था कि NALSAR से वर्ष 2026 में कानून की डिग्री प्राप्त करने वाले किसी भी छात्र को वकील के रूप में नामांकित नहीं किया जाएगा। BCI के इस फैसले का व्यापक विरोध हुआ। विवाद बढ़ने के कुछ समय बाद ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपना फैसला वापस ले लिया था।
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BCI अध्यक्ष ने कहा था- छात्रों के प्रति कोई गलत भावना नहीं
BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बाद में कहा था कि संस्था की छात्रों के प्रति कोई गलत भावना नहीं है और उसका उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार BCI या राज्य बार काउंसिलों के बजाय संबंधित शिक्षण संस्थान के पास होगा।




















