मौत के बाद भी नहीं मिली ‘मुक्ति’! रुपए लेकर चिता में कम पड़ी लकड़ियां, दूसरे दिन अधजला मिला बुजुर्ग का शव

इंदौर। जिस जगह इंसान अपने जीवन की आखिरी यात्रा पूरी करता है, वहां भी यदि लापरवाही बरती जाए तो इससे ज्यादा शर्मनाक व्यवस्था क्या होगी। छोटा बांगड़दा स्थित नगर निगम के मुक्तिधाम में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। 75 वर्षीय छगनलाल शर्मा के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों ने 3500 रुपए जमा किए, लेकिन चिता के लिए पर्याप्त लकड़ियां नहीं मिलीं। कर्मचारियों ने लकड़ियां कम होने की बात को नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अगले दिन जब परिवार अस्थि संचय के लिए पहुंचा तो बुजुर्ग का शव अधजला पड़ा था।
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घटना 31 अगस्त की है। छोटा बांगड़दा निवासी छगनलाल शर्मा की मृत्यु के बाद परिवार शाम करीब 5.30 बजे वार्ड-16 के मुक्तिधाम पहुंचा। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। उनके नाती हेमंत शर्मा ने वहां 3500 रुपए जमा कर रसीद ली। इसके बाद मुक्तिधाम के कर्मचारी कुशवाह और अन्य कर्मचारी चिता तैयार करने के लिए लकड़ियां और कंडे जमा करने लगे। चिता तैयार होते समय वहां मौजूद समाज के लोगों की नजर लकड़ियों पर पड़ी। उन्हें साफ लगा कि चिता के लिए लकड़ियां कम हैं। उन्होंने कर्मचारियों से और लकड़ियां लगाने को कहा, लेकिन कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया कि अभी लकड़ियां पर्याप्त हैं और जरूरत पड़ने पर बाद में और लकड़ियां डाल दी जाएंगी। परिवार ने कर्मचारियों की बात पर भरोसा किया और अंतिम संस्कार के बाद घर लौट गया।
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दूसरे दिन मुक्तिधाम पहुंचे तो मंजर देखकर उड़े होश
बुधवार होने के कारण परिवार ने तीसरे का कार्यक्रम अगले ही दिन रखा था। जब परिजन अस्थि संचय के लिए दोबारा मुक्तिधाम पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। जिस शव का अंतिम संस्कार एक दिन पहले किया गया था, वह पूरी तरह जल नहीं पाया था। शव अधजला पड़ा था और कर्मचारी उस पर दोबारा लकड़ियां लगाने की तैयारी कर रहे थे। यह देखकर परिवार के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मुक्तिधाम में हंगामा शुरू हो गया। परिजनों ने निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को फोन लगाकर पूरी घटना की जानकारी दी। मामला बढ़ता देख कर्मचारियों की ओर से सफाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके बाद अतिरिक्त लकड़ियां जुटाकर बुजुर्ग के शव का दोबारा अंतिम संस्कार कराया गया।
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‘पहली बार नहीं हुआ ऐसा’, पहले भी सामने आईं 3-4 शिकायतें
परिजनों का आरोप है कि मुक्तिधाम की अव्यवस्थाओं का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां 3 से 4 बार इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार कर्मचारियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से हालात जस के तस बने हुए हैं। परिजनों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए राशि लेने के बाद चिता के लिए पर्याप्त लकड़ियां उपलब्ध कराना मुक्तिधाम की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि शव अधजला रह जाए और परिवार को अगले दिन यह दृश्य देखना पड़े तो यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर संवेदनहीनता है।
नाती बोला- ऐसी लापरवाही पर कार्रवाई जरूरी
हेमंत ने कहा कि परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए पूरी राशि जमा की थी। इसके बावजूद चिता के लिए लकड़ियां कम थीं। मौके पर मौजूद लोगों ने कर्मचारियों को इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। अस्थि संचय के लिए जब परिवार दोबारा पहुंचा तो अधजला शव देखकर सभी को गहरा सदमा लगा। उन्होंने निगम कमिश्नर सहित वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की है। उनका कहना है कि दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी दूसरे परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
अपर आयुक्त बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
नगर निगम अपर आयुक्त मनोज पाठक ने कहा कि छोटा बांगड़दा मुक्तिधाम की घटना की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जा रही है। संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर स्थिति देखने और पीड़ित परिवार के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।




















