सुहागरात पर पत्नी नहीं शरमाई तो फैमिली कोर्ट पहुंच गया पति, हनीमून का प्लान नहीं बनाने पर भी रिश्ते में दरार

पल्लवी वाघेला, भोपाल। सुहागरात में पत्नी न शरमाई तो पति को चरित्र पर शक हो गया, करवा चौथ पर पति ने व्रत नहीं रखा तो पत्नी को लगा प्यार कम हो गया, तो वहीं फिल्मी स्टाइल में न दुल्हन का स्वागत हुआ न पति ने हनीमून के फिल्मी प्लान बनाएं। फिल्मों में दिखने वाले रोमांस को असल जिंदगी में हूबहू देखने की चाह अब रिश्तों पर भारी पड़ रही है। भोपाल फैमिली कोर्ट में ऐसे तीन पहुंचे, जहां शादी के बाद साथी का व्यवहार फिल्मों में दिखाए गए किरदार जैसा न होने पर छोटी-छोटी बातें शक और विवाद का कारण बन गई। काउंसलर्स के मुताबिक पति-पत्नी के बीच विवाद की वजह कोई बड़ी घटना नहीं, बल्कि रिश्ते को लेकर बनी फिल्मी अपेक्षाएं और सोशल मीडिया पर खुद को प्रेजेंट न कर पाना है। इनमें एक मामले में तो पति पर फिल्मी सनक इस कदर सवार है कि मनोचिकित्सक से मदद लेनी पड़ी।
केस-1: पत्नी के सहज व्यवहार पर गलत अर्थ
डेढ़ साल पहले हुई शादी के एक माह के अंदर ही पति ने पत्नी से अलग होने का मन बना लिया। जानकारी के मुताबिक दंपति की शादी अधिक उम्र में हुई है। शादी के वक्त पति की उम्र 33 के करीब और पत्नी की 29 वर्ष थी। पति का कहना है कि सुहागरात में न तो पत्नी घूंघट लेकर बैठी और न ही उसके करीब आने पर उस तरह झिझकी या शर्माई जैसा उसने फिल्मों में देखा है। पत्नी के सहज व्यवहार को उसने गलत अर्थ में लिया और उसके चरित्र पर संदेह के चलते डिप्रेशन में आ गया। वह बात-बात पर पत्नी से सवाल-जवाब करने लगा और मामला कोर्ट तक जा पहुंचा। मामले में पति इतना अधिक डिप्रेशन में है कि मनोचिकित्सकीय के माध्यम से उसका इलाज करवाया जा रहा है।
केस-2: पत्नी की जिद पति भी रखे करवा चौथ का व्रत
इसी तरह अन्य मामले में दंपति की शादी को एक साल हुआ है। जुलाई में हुई शादी के बाद जब पहला करवा चौथ का व्रत आया तो पत्नी ने कहा कि पति भी उसके लिए व्रत रखे जैसा फिल्म और सीरियल में होता है। पति ने मना कर दिया। यही नहीं पत्नी का आरोप है कि पहला करवा चौथ का व्रत इतने सादे तरीके से हुआ, न उसमें फिल्मों जैसा ताम-झाम था और न घर में वैसी रौनक लगी। पत्नी ने कहा कि पति ने उसे बस एक मोबाइल गिफ्ट कर दिया। जबकि पहले व्रत पर उसे बहुत कुछ स्पेशल होने की उम्मीद थी और वो यह सब अपनी रील्स में दिखाना चाहती थी।
केस–3: शादी में एंट्री, ससुराल में गृह प्रवेश साधारण तो रूठी पत्नी
बीते साल कोर्ट पहुंचे इस मामले में सोमवार को दंपति के बीच सुलह हुई है। पति ने पत्नी के व्यवहार से आहत होकर अक्टूबर में केस लगाया था। पति ने कहा कि पत्नी शादी के बाद केवल एक महीना साथ रही और तब से मायके जा बैठी है। काउंसलिंग में पत्नी ने कहा कि उसके शादी के सारे अरमान पति ने चूर-चूर कर दिए। पत्नी ने कहा कि उसने पति से मांग की थी कि शादी में उनकी एंट्री धांसू हो लेकिन पति ने इसे फिल्मी चोचले कहकर मना कर दिया। इसके बाद ससुराल में गृह प्रवेश भी बेहद ठंडा रहा। पत्नी ने कहा कि यहां तक भी वह चुप रही लेकिन पति ने उसके लिए ढंग का हनीमून डेस्टिनेशन भी प्लान नहीं किया। कहने पर उल्टा उसे डांट दिया। इसलिए उसने भी घर छोड़ दिया। मामले में काउंसलिंग के बाद अब दंपति साथ हैं।
असल में रोज निभाना है रिश्ता
फिल्मों में रिश्तों को अक्सर खूबसूरत, रोमांटिक और नाटकीय अंदाज में दिखाया जाता है। हालांकि, वह केवल दो या तीन घंटे का रोमांस होता है, लेकिन असल जिंदगी में दंपति का रिश्ता रोज नई कसौटी से गुजरता है। दर्शक कई बार अनजाने में इन्हीं दृश्यों को वास्तविक जीवन के रिश्तों का पैमाना मान लेते हैं, जबकि वास्तविक जीवन में ऐसा नहीं होता। हर व्यक्ति का आर्थिक और सामाजिक बैकग्राउंड और स्वभाव अलग होता है। वहीं सोशल मीडिया फोमो ने भी इस भावना को बढ़ाया है। जरूरी है कि फिल्मी किरदार और असल जीवन को अलग रखा जाए। रिश्ते में संवाद, विश्वास और एक-दूसरे की व्यक्तिगत पसंद का सम्मान ज्यादा महत्वपूर्ण है।
प्रतिभा राजगोपाल, निदेशक, मीडिएशन सेंटर




















