सोहागपुर में दवा के छिड़काव के बाद सूखी धान की फसल! 2 हजार एकड़ तक नुकसान का दावा

सोहागपुर क्षेत्र में एक खरपतवार नाशक दवा के इस्तेमाल के बाद धान की फसल खराब होने का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि ‘विल सुपर’ नाम की दवा के छिड़काव के बाद कई खेतों में धान की फसल सूख गई और पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसानों ने मामले की जांच और नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
1500 से 2000 एकड़ फसल प्रभावित होने का दावा
क्षेत्र के किसान और कांग्रेस नेता पुष्पराज पटेल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मामले में कार्रवाई की मांग की है। उनके मुताबिक, शुरुआती अनुमान में करीब 1500 से 2000 एकड़ धान की फसल प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। पुष्पराज पटेल का आरोप है कि किसान कई बार कंपनियों और विक्रेताओं के बड़े-बड़े दावों के भरोसे कृषि दवाएं खरीद लेते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी दवा के इस्तेमाल से किसानों की फसल खराब हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
‘विल सुपर’ के छिड़काव के बाद फसल खराब होने का आरोप
किसानों का आरोप है कि बहुराष्ट्रीय कृषि-रसायन कंपनी विलवुड इंडिया की खरपतवार नाशक दवा ‘विल सुपर’ के इस्तेमाल के बाद खेतों में धान की फसल सूख गई। हालांकि, फसल खराब होने की वास्तविक वजह क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। कृषि विभाग और कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह तय होगा कि नुकसान दवा के इस्तेमाल से हुआ या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।
डीलर ने भी मांगी निष्पक्ष जांच
सोहागपुर स्थित कंपनी के अधिकृत डीलर छाबड़िया ब्रदर्स ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की मांग की है। डीलर का कहना है कि इस मामले की जानकारी कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी जा चुकी है। वहीं, कंपनी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों को भी मौके पर बुलाने की बात कही गई है। प्रभावित खेतों का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने की तैयारी की जा रही है।
किसानों के मुआवजे की मांग
फसल खराब होने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित खेतों का जल्द सर्वे कराने और नुकसान का उचित आकलन करने की मांग की है। कांग्रेस नेता पुष्पराज पटेल ने कहा कि यदि जांच के बाद कंपनी या विक्रेता की जिम्मेदारी सामने आती है और किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलता, तो किसानों के हित में कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।
प्रशासन और कृषि विभाग की जांच का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले में जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। प्रभावित खेतों के सर्वे और दवा के तकनीकी परीक्षण के बाद ही फसल खराब होने के कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी। किसानों ने मांग की है कि जांच जल्द पूरी कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को राहत दी जाए।




















