चीन से भारत आने वाला फर्नीचर महंगा! Sea Freight में 300% उछाल, मुंबई पोर्ट पर 150 कंटेनर अटके

नई दिल्ली। चीन से भारत सामान मंगाने वाले Importer के लिए सितंबर 2026 में मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तरफ चीन से भारत आने वाले समुद्री माल ढुलाई किराए में तेज बढ़ोतरी हुई है, तो दूसरी तरफ फर्नीचर के आयात पर भारतीय मानकों का पालन अनिवार्य होने से कारोबारियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, Shanghai-Mundra Route पर 40-फुट कंटेनर का किराया सितंबर में करीब 5,400 डॉलर तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि जनवरी 2026 में इसी रूट पर एक 40-फुट कंटेनर का किराया करीब 1,350 डॉलर था। अगस्त में यह बढ़कर लगभग 3,500 डॉलर और सितंबर में 5,400 डॉलर तक पहुंच गया। यानी कुछ ही महीनों में समुद्री माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ गई है।
40-फुट कंटेनर का किराया 1,350 से बढ़कर 5,400 डॉलर
चीन से भारत सामान आयात करने वाले कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता बढ़ता हुआ Sea Freight Rate है। जनवरी में जहां एक कंटेनर भेजने के लिए करीब 1,350 डॉलर खर्च हो रहे थे, वहीं सितंबर में यही लागत करीब 5,400 डॉलर तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ रहा है जो चीन से बड़े पैमाने पर फर्नीचर और अन्य सामान भारत मंगाते हैं। माल की कीमत के अलावा अब कंटेनर की ढुलाई पर भी काफी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इससे सामान की कुल लागत बढ़ने की संभावना है।
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चीन के पोर्ट्स पर भीड़ और कंटेनर की कमी
शिपिंग बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, माल ढुलाई की लागत बढ़ने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। चीन के प्रमुख पोर्ट्स पर बढ़ती भीड़, खाली कंटेनरों की कमी और सीमित जहाज क्षमता के कारण उपलब्ध वेसल स्पेस कम हुआ है। जब जहाजों में जगह सीमित होती है तो कंटेनर बुक करने के लिए Importer को ज्यादा किराया देना पड़ता है। यही वजह है कि चीन से भारत आने वाले रूट पर फ्रेट रेट में अचानक तेजी देखने को मिली है।
मुंबई पोर्ट पर 150 कंटेनर अटके
बढ़ती समुद्री माल ढुलाई लागत के बीच मुंबई पोर्ट पर चीन से आए करीब 150 कंटेनरों के अटकने की बात सामने आई है। इन कंटेनरों में फर्नीचर से जुड़ा सामान भी शामिल बताया जा रहा है। फर्नीचर कारोबारियों के लिए समस्या सिर्फ बढ़ती ढुलाई लागत तक सीमित नहीं है। भारत में फर्नीचर के लिए लागू किए गए नए गुणवत्ता नियमों के कारण आयात किए गए उत्पादों की नियामकीय जांच भी अहम हो गई है।
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फर्नीचर आयात पर BIS के नियम हुए सख्त
भारत सरकार ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS के तहत Furniture Quality Control Order को अनिवार्य रूप से लागू किया है। इसके तहत तय श्रेणियों के फर्नीचर को संबंधित भारतीय मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। इनमें वर्क चेयर, टेबल, डेस्क, बेड और स्टोरेज यूनिट समेत फर्नीचर की कई प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं। निर्धारित नियमों के तहत उत्पादों के लिए संबंधित प्रमाणन और ISI Standard Mark की आवश्यकता हो सकती है। इसका मतलब है कि सिर्फ चीन से सामान मंगाकर भारत पहुंचा देना पर्याप्त नहीं होगा। आयातकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका फर्नीचर भारतीय गुणवत्ता मानकों और जरूरी प्रमाणन की शर्तों को पूरा करता हो।
बिना प्रमाण वाले सामान की क्लीयरेंस में दिक्कत
नए नियमों के बाद निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले फर्नीचर की क्लीयरेंस में परेशानी हो सकती है। ऐसे में कारोबारियों के लिए पहले से ही उत्पाद की गुणवत्ता, प्रमाणन और जरूरी दस्तावेजों की जांच करना महत्वपूर्ण हो गया है। अगर किसी आयातित फर्नीचर की खेप आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करती है, तो बंदरगाह पर उसकी क्लीयरेंस प्रभावित हो सकती है। इससे कारोबारियों की लागत और इंतजार दोनों बढ़ सकते हैं।
MSME कारोबारियों के लिए भी समयसीमा खत्म
Furniture QCO को लागू करने से पहले कारोबारियों को संक्रमण अवधि दी गई थी। 13 फरवरी 2026 से बड़े और मध्यम उद्यमों तथा प्राथमिक आयातकों के लिए अनिवार्य अनुपालन शुरू हुआ था। इसके बाद छोटे और MSME कारोबारियों को भी अतिरिक्त समय दिया गया। उनकी अंतिम समयसीमा 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब फर्नीचर आयात करने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी निर्धारित भारतीय मानकों का पालन करना जरूरी हो गया है।
Importer के सामने डबल चुनौती
चीन से भारत सामान मंगाने वाले कारोबारियों के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां दिखाई दे रही हैं। पहली चुनौती बढ़ता Sea Freight Rate है, जिसने कंटेनर भेजने की लागत को कई गुना बढ़ा दिया है। दूसरी चुनौती BIS और Furniture QCO के नियमों का अनुपालन है।



















