सुभाष चंद्रा की बढ़ी मुश्किलें, NCLT की 5 सदस्यीय बेंच ने CBI को भेजा नोटिस; 4 हफ्ते में जवाब देने का निर्देश

नई दिल्ली। Zee Group के फाउंडर सुभाष चंद्रा की पर्सनल इंसॉल्वेंसी कार्यवाही में नया मोड़ आया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय बेंच ने मामले में CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एजेंसी को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया गया है।
₹22 हजार करोड़ से ज्यादा के दावे
सुभाष चंद्रा के खिलाफ चल रही पर्सनल इंसॉल्वेंसी कार्यवाही में क्रेडिटर्स के करीब ₹22,006.57 करोड़ के दावे सामने आए हैं। वहीं, पहले मंजूर किए गए रिपेमेंट प्लान में क्रेडिटर्स को ₹6.25 करोड़ देने का प्रस्ताव था। इसके अलावा इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के खर्च के लिए ₹25 लाख रखे गए थे। हालांकि, NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने पहले दिए गए इस आदेश पर रोक लगा दी है और मामले की दोबारा सुनवाई करने का फैसला किया है।
पहले क्यों बनी थी पांच सदस्यीय बेंच?
मामले की सुनवाई पहले दो सदस्यीय बेंच कर रही थी, लेकिन दोनों सदस्यों की राय अलग थी। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य के पास गया। तीसरे सदस्य ने 25 अगस्त 2026 को कुछ बदलावों के साथ रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। बाद में यह सामने आया कि तीनों सदस्यों की राय से स्पष्ट बहुमत नहीं बन रहा है। इसके बाद NCLT के प्रेसिडेंट ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच गठित की।
संपत्तियां बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक
पांच सदस्यीय बेंच ने रिपेमेंट प्लान की मंजूरी पर रोक लगाते हुए सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने, ट्रांसफर करने या किसी अन्य तरीके से अलग करने से रोक दिया है।
LIC Housing Finance मामले में CBI जांच
इसी बीच CBI ने LIC Housing Finance की शिकायत पर सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ कथित ₹1,322 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में FIR दर्ज की है। CBI की जांच में कथित तौर पर लोन हासिल करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई नेटवर्थ और गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों की जांच की जा रही है। आरोपों की पुष्टि होना अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है। अब NCLT की पांच सदस्यीय बेंच CBI और मामले से जुड़े अन्य पक्षों के जवाब मिलने के बाद आगे की सुनवाई करेगी।




















