बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने के खिलाफ चार महिला पहलवानों की अपील, कोर्ट ने नोटिस जारी किया

नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के फैसले को चार महिला पहलवानों ने चुनौती दी है। इस याचिका पर सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की सेशन कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह, मामले में सह-आरोपी रहे विनोद तोमर और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को होगी। चारों पहलवानों ने अपनी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में ट्रायल कोर्ट के 3 अगस्त 2026 के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बरी करने का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र आकलन करने के बजाय अनुमानों, विसंगतियों और पीड़ितों के व्यवहार को लेकर पुराने नजरिए पर आधारित था।
9 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को देना होगा जवाब
विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर से जवाब मांगा। दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 9 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया है। 4 महिला पहलवानों की ओर से यह याचिका 25 सितंबर को दाखिल की गई थी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने मामले में पक्ष रखा।
पहलवानों ने फैसले को बताया कानूनन टिकने योग्य नहीं
अपील में महिला पहलवानों ने दावा किया है कि निचली अदालत का फैसला “अनुमानों और अटकलों” पर आधारित था। उनका कहना है कि फैसले में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिलाओं से अपेक्षित व्यवहार को लेकर पुराने और रूढ़िवादी नजरिए का इस्तेमाल किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि निचली अदालत ने गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करने के बजाय छोटी-छोटी विसंगतियों और अलग-अलग विरोधाभासों पर ज्यादा जोर दिया। पहलवानों का तर्क है कि इस आधार पर अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को खारिज करना उचित नहीं था।
‘आदर्श पीड़िता’ के नजरिए पर भी उठाया सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रायल कोर्ट ने पूरे फैसले में ‘आदर्श पीड़िता’ जैसी धारणा को आधार बनाया। इसमें यह तर्क दिया गया कि यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली महिला हमेशा तुरंत विरोध या शिकायत नहीं करती और कई बार करियर, नौकरी या पेशेवर संबंधों को बचाने के लिए चुप रह सकती है। पहलवानों ने यह भी कहा है कि शिकायतकर्ताओं के किसी घटना की तारीख को बिल्कुल सटीक रूप से याद न रख पाने या आरोपी के साथ पेशेवर संपर्क बने रहने को उनके आरोपों को खारिज करने का निर्णायक आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
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3 अगस्त को बरी हुए थे बृजभूषण और विनोद तोमर
राउज एवेन्यू कोर्ट की मजिस्ट्रेट अदालत ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को संदेह से परे साबित न किए जाने का आधार लिया था। अदालत के विस्तृत फैसले में गवाहों के बयानों में विरोधाभास, दस्तावेजी साक्ष्यों में असंगतियां और कथित घटनाओं के समय तत्काल शिकायत नहीं किए जाने जैसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया था।
6 महिला पहलवानों की शिकायत से शुरू हुआ था मामला
यह पूरा मामला छह महिला पहलवानों की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 15 जून 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में बृजभूषण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354A और 354D के तहत आरोप लगाए गए थे। विनोद तोमर के खिलाफ धारा 354, 354A के साथ धारा 109 और 506 के तहत भी आरोपपत्र दाखिल किया गया था। दिल्ली पुलिस की 2023 की जांच में कई गवाहों के बयान के साथ फोटो, वीडियो और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे तकनीकी साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया था।
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अब अपील पर होगी आगे की सुनवाई
चार महिला पहलवानों की अपील के बाद अब बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। दिल्ली पुलिस भी नोटिस के जवाब में अपनी स्थिति बताएगी। फिलहाल सेशन कोर्ट ने अपील को खारिज नहीं किया है। 9 अक्टूबर की सुनवाई में जवाब मिलने के बाद अदालत मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगी।




















