इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट अब होगी सार्वजनिक, हाईकोर्ट ने हटाई रोक

इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में लंबे समय से प्रतीक्षित जांच रिपोर्ट अब सार्वजनिक होगी। इंदौर हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को वेबसाइट पर अपलोड करने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में करीब 600 पन्नों की यह रिपोर्ट हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध हो जाएगी। इसके साथ ही रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर लगी रोक भी हट गई है।
अधिवक्ताओं ने लगाई हैं याचिकाएं
मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से रिपोर्ट उपलब्ध कराने और उसे सार्वजनिक करने की मांग रखी गई, जिसे बेंच ने स्वीकार कर लिया। भागीरथपुरा मामले को लेकर अधिवक्ता रितेश ईनानी, अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल, अधिवक्ता मनीष यादव और अन्य की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इस मामले की मुख्य याचिका अधिवक्ता रितेश ईनानी की ओर से दायर की गई थी। सोमवार की सुनवाई में अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल, मनीष यादव और शोभित गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख पा रहे हैं। रिपोर्ट के बिना मामले में आगे की सुनवाई करना भी मुश्किल होगा। इसलिए रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई।
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वेबसाइट पर स्कैन कर अपलोड करेंगे
याचिकाकर्ताओं की मांग पर हाईकोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट को स्कैन कर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर ही अपलोड कर दिया जाएगा। इससे सभी याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध हो जाएगी और उन्हें अलग-अलग कॉपी देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इसमें जांच आयोग द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्षों और जिम्मेदारी तय करने से जुड़े बिंदुओं की जानकारी सभी पक्षों के सामने आ सकेगी।
जनवरी में गठित हुआ था जांच आयोग
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट ने जनवरी में सेवानिवृत्त जस्टिस सुशील गुप्ता की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था। आयोग ने मामले की जांच के बाद अगस्त में करीब 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी थी। रिपोर्ट में टेंडर कमेटी और कुछ अधिकारियों को मामले में हुई देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया था। वहीं, रिपोर्ट में एमआईसी और महापौर को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई थी। अब रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होने के बाद भागीरथपुरा कांड की जांच के निष्कर्षों और इसमें जिम्मेदारी तय किए जाने से जुड़े तथ्यों की पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।
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