दीवाली-छठ पर हवाई टिकट हो सकते हैं महंगे, सरकार ने किराए पर कैप लगाने से किया इनकार

दीवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर घर जाने की तैयारी कर रहे हवाई यात्रियों को इस बार टिकट के लिए ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि त्योहारी सीजन में घरेलू हवाई किराए पर अलग से कोई कानूनी सीमा यानी किराया कैप लगाने की योजना नहीं है। हालांकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय एयरलाइंस के संपर्क में रहेगा और यात्रियों पर ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए उचित किराया बनाए रखने की अपील की जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि त्योहारों के दौरान सरकार हवाई किराए पर कोई कैप नहीं लगाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एयरलाइंस से लगातार बातचीत करती है और उनसे यात्रियों के लिए किराए को उचित स्तर पर रखने का आग्रह किया जाता है।
ईंधन की कीमतों का असर हवाई किराए पर
मंत्री के मुताबिक एयरलाइंस के परिचालन खर्च में विमान ईंधन यानी एटीएफ की बड़ी हिस्सेदारी होती है। सामान्य परिस्थितियों में एटीएफ एयरलाइन की परिचालन लागत का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। ईंधन की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर यह हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ऐसे में ईंधन की कीमत बढ़ने का असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ता है और इसका प्रभाव टिकट किराए पर भी दिखाई दे सकता है। सरकार ने इसी दबाव को देखते हुए 2026 में घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित करने और लैंडिंग तथा पार्किंग शुल्क में कटौती जैसे कदम भी उठाए हैं।
त्योहारों में बढ़ जाती है हवाई यात्रा की मांग
दीवाली और छठ के दौरान देश के कई हिस्सों में हवाई यात्रा की मांग बढ़ जाती है। खास तौर पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जाने वाली उड़ानों में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर टिकट के दाम भी ऊपर जा सकते हैं। मांग बढ़ने और उपलब्ध सीटें सीमित होने की स्थिति में विमानन कंपनियों के किराए अलग-अलग स्तर पर तय हो सकते हैं। इसलिए त्योहारों के करीब यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए पहले टिकट बुक करना अक्सर महत्वपूर्ण हो जाता है।
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सरकार एयरलाइंस के संपर्क में रहेगी
राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार पहले भी त्योहारों और महत्वपूर्ण मौकों पर एयरलाइंस के साथ बैठकें करती रही है। मंत्रालय का प्रयास रहेगा कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को बहुत ज्यादा किराए का दबाव न झेलना पड़े। हालांकि सरकार ने इस बार सामान्य घरेलू उड़ानों के किराए के लिए कोई अलग कानूनी सीमा तय करने से इनकार किया है। इसका मतलब है कि टिकट की कीमतें मांग, उपलब्ध सीटों और एयरलाइन की लागत जैसे कई कारकों के आधार पर बदलती रहेंगी।
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ATF पर सरकार ने पहले भी उठाए कदम
वेस्ट एशिया संकट के दौरान ईंधन की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू एयरलाइंस को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। अप्रैल 2026 में सरकार ने घरेलू परिचालन के लिए एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित किया था और घरेलू एयरलाइंस के लैंडिंग तथा पार्किंग शुल्क में तीन महीने के लिए 25 प्रतिशत कटौती की थी।




















