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CG NEWS:ऑडिट में बड़ा खुलासा: रायपुर से भानुप्रतापपुर तक 11 निकायों को 10 करोड़ की चपत, टैक्स वसूली और वित्तीय गड़बड़ियों पर सवाल

स्टेट ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 में उजागर हुई लापरवाही, 800 आपत्तियों में सिर्फ 2 का निपटारा, करोड़ों की वसूली अटकी प्रदेश के 11 नगरीय निकायों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से करीब 9.99 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि टैक्स वसूली, यूजर चार्ज, विज्ञापन शुल्क और अन्य राजस्व स्रोतों की अनदेखी के कारण निकायों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई।
ऑडिट में बड़ा खुलासा: रायपुर से भानुप्रतापपुर तक 11 निकायों को 10 करोड़ की चपत, टैक्स वसूली और वित्तीय गड़बड़ियों पर सवाल

प्रेम कुमार, रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था पर राज्य संपरीक्षा (स्टेट ऑडिट) की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 11 नगरीय निकायों में टैक्स वसूली की ढिलाई, नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के कारण करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। राजधानी रायपुर नगर निगम से लेकर कांकेर के भानुप्रतापपुर तक कई मामलों में करोड़ों रुपये की वसूली नहीं हो सकी, जबकि सैकड़ों ऑडिट आपत्तियां वर्षों से लंबित हैं।

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ऑडिट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

राज्य संपरीक्षा की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार प्रदेश के 11 नगरीय निकायों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से करीब 9.99 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि टैक्स वसूली, यूजर चार्ज, विज्ञापन शुल्क और अन्य राजस्व स्रोतों की अनदेखी के कारण निकायों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई।

रायपुर निगम में सबसे बड़ी चूक

राजधानी रायपुर नगर निगम में वर्ष 2015-16 और 2016-17 के दौरान निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप 7.52 करोड़ रुपये का यूजर चार्ज वसूल नहीं किया गया। इसके अलावा होर्डिंग, विज्ञापन बोर्ड और निजी भवनों पर लगे कमर्शियल बोर्डों का 1.69 करोड़ रुपये का किराया भी वसूला नहीं गया। इससे निगम को भारी राजस्व नुकसान हुआ।

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भानुप्रतापपुर में नियम विरुद्ध भुगतान

कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में भंडार क्रय नियमों का पालन किए बिना 72.96 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। ऑडिट रिपोर्ट में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

800 ऑडिट आपत्तियां, जवाब सिर्फ दो का

राज्य संपरीक्षा विभाग ने 27 नगरीय निकायों के 55 वित्तीय वर्षों के खातों की जांच की। इस दौरान 800 ऑडिट आपत्तियां दर्ज हुईं, लेकिन केवल 2 आपत्तियों का ही निराकरण किया गया। बाकी 798 आपत्तियां अब भी लंबित हैं।

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टैक्स वसूली में भी भारी लापरवाही

रिपोर्ट के अनुसार दुर्ग जिले की नगर पंचायत उतई में 31.97 लाख रुपये और नगर पालिका कटघोरा में 74.55 लाख रुपये का टैक्स वर्षों तक बकाया रहा। इसके बावजूद संबंधित निकायों ने प्रभावी वसूली अभियान नहीं चलाया।

सरकारी अनुदान पर बढ़ती निर्भरता

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि नगरीय निकाय यूजर चार्ज, मोबाइल टॉवर शुल्क, विज्ञापन कर और अन्य स्थानीय राजस्व स्रोतों से आय बढ़ाने में असफल रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि अधिकांश निकाय अपने खर्चों के लिए सरकारी अनुदान पर निर्भर होते जा रहे हैं।

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क्या कहती है रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय अनुशासन, समय पर टैक्स वसूली, पारदर्शी खरीदी प्रक्रिया और ऑडिट आपत्तियों के निराकरण में सुधार की आवश्यकता है। साथ ही निकायों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोत मजबूत करने की भी जरूरत बताई गई है।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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