Raipur:शीतकालीन सत्र में UCC पर बड़ा दांव,छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता का बिल होगा पेश

प्रेम कुमार रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में साय सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में UCC से संबंधित विधेयक पेश किया जा सकता है। विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने रायपुर में मंथन शुरू कर दिया है।
रायपुर में जुटे जनप्रतिनिधि और कानून विशेषज्ञ
राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में 27 अगस्त को राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में करीब 200 प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और कानून विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया। बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रावधानों, उनके संभावित सामाजिक प्रभाव और व्यावहारिक पहलुओं पर व्यापक चर्चा करना था। अलग-अलग वर्गों से पहुंचे लोगों ने समिति के सामने अपने सुझाव और विचार रखे।

हर वर्ग की राय से बनेगा UCC का ड्राफ्ट
राज्य सरकार UCC का मसौदा तैयार करने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया अपना रही है। समिति का प्रयास है कि कानून तैयार करते समय सभी समुदायों के अधिकारों, परंपराओं और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। इसके लिए धार्मिक, सामाजिक और विधिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी चरणबद्ध तरीके से संवाद किए जाने की योजना है। समिति विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों के आधार पर UCC के संभावित प्रावधानों पर मंथन करेगी।
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विवाह से उत्तराधिकार तक आएगा समान कानून
समान नागरिक संहिता का प्रमुख उद्देश्य धर्म, जाति या पंथ से अलग सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे विषयों को शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में महिला और पुरुष को समान अधिकार देने तथा अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ी कानूनी जटिलताओं को कम करने पर भी जोर है।

संविधान के अनुच्छेद 44 को बनाया आधार
संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। इसी नीति-निर्देशक तत्व को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सुझाव जुटाकर व्यापक और समावेशी प्रारूप तैयार करने की दिशा में काम करेगी।
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पांच सदस्यों की समिति करेगी ड्राफ्ट तैयार
छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC के प्रारूप के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। समिति राज्य में UCC लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के साथ विभिन्न समुदायों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों का भी अध्ययन करेगी।

किन कानूनों और मुद्दों पर होगी स्टडी?
समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और अन्य नागरिक मामलों से संबंधित मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही विभिन्न समुदायों के मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन कर ऐसा प्रारूप तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जिसमें सभी वर्गों के हितों और अधिकारों का ध्यान रखा जा सके।
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रिपोर्ट के बाद सरकार लेगी अगला फैसला
समिति अपनी अध्ययन प्रक्रिया पूरी करने के बाद UCC का प्रारूप और आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक सुझाव राज्य सरकार को सौंपेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। समिति की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद विधेयक को विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
UCC लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
UCC लागू होने की स्थिति में प्रदेश के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू हो सकती है। फिलहाल अलग-अलग समुदायों में इन मामलों को लेकर अलग-अलग व्यक्तिगत कानून और परंपराएं लागू हैं। प्रस्तावित UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाले कानूनी अंतर को कम करना और नागरिक अधिकारों में समानता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
देश के कई राज्यों में बढ़ी UCC की कवायद
छत्तीसगढ़ से पहले देश के कुछ राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना। इसके अलावा गुजरात और असम में भी UCC को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। वहीं गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से सिविल कोड लागू है, जिसे गोवा सिविल कोड के रूप में जाना जाता है। हालांकि इसे आधुनिक अर्थों में पूर्ण UCC नहीं माना जाता, क्योंकि इसमें कुछ समुदायों के लिए विशेष प्रावधान मौजूद हैं।




















