Bilaspur:बिलासपुर पुलिस कस्टडी मौत मामले में CBI की FIR: अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच तेज

प्रेम कुमार,रायपुर: बिलासपुर में जनवरी 2024 में श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत के बाद हुई मौत के मामले में अब CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद CBI ने हत्या की धारा 302 के तहत अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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CBI ने दर्ज की हत्या की FIR
CBI ने 30 जुलाई 2026 को बिलासपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को अपनी जांच की मुख्य FIR माना है। इसी मामले को आधार बनाकर CBI ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या की धारा 302 में केस दर्ज किया है। फिलहाल FIR में किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच में तेजी
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI जांच के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा है कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी निष्पक्ष जांच की जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी की हिरासत में हिंसा या मौत में भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की भूमिका भी CBI के रडार पर
मामले में केवल हिरासत में मौजूद अधिकारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। CBI उपलब्ध केस डायरी, मेडिकल दस्तावेजों और न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
17 जनवरी को पुलिस लेकर गई थी श्रवण को
ग्राम मोहरा निवासी 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी खेती-किसानी करता था। परिवार के मुताबिक जनवरी 2024 में पुलिस उसे अपने साथ लेकर गई थी। पुलिस ने 18 जनवरी को 6 लीटर महुआ शराब के साथ गिरफ्तारी का दावा किया और आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 19 जनवरी को उसे कोर्ट में पेश किया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
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जेल पहुंचने के बाद बिगड़ी तबीयत
20 जनवरी को परिजन जेल में श्रवण से मिलने पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके अगले दिन 21 जनवरी को जेल में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में उसका उपचार किया गया। हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया।
22 जनवरी को सिम्स में मौत
जेल प्रबंधन के अनुसार श्रवण को सांस लेने में परेशानी के बाद सिम्स अस्पताल भेजा गया था। अस्पताल पहुंचने के बाद देर रात उसकी मौत हो गई। इसके बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठे और मामले की न्यायिक जांच शुरू हुई।
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न्यायिक जांच में सिर की चोट का जिक्र
22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL समेत अन्य दस्तावेजों की जांच का उल्लेख है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक शरीर में रासायनिक जहर नहीं मिला था। मेडिकल जांच में सिर में लगी चोट के बाद कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट को मौत की वजह बताया गया था।
पत्नी ने पुलिस पर लगाया था सवाल
न्यायिक जांच में श्रवण की पत्नी लहराबाई सूर्यवंशी का बयान भी दर्ज हुआ था। उसने बताया था कि थाना सीपत से पुलिसकर्मी श्रवण को लेकर गए थे। बाद में उसे जानकारी मिली कि श्रवण को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है और अगले दिन उसकी मौत की सूचना मिली। पत्नी ने कहा कि मौत की वास्तविक वजह उसे पता नहीं थी।
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पिता ने भी पुलिस हिरासत में ले जाने की बात कही
श्रवण के पिता अमृतलाल ताम्र ने जांच के दौरान बताया था कि 18 जनवरी की शाम करीब 6:30 बजे थाना सीपत की पुलिस श्रवण को शराब के मामले में लेकर गई थी। 21 जनवरी की रात उन्हें जानकारी मिली कि श्रवण को जेल से सिम्स अस्पताल भेजा गया है। अगले दिन सुबह करीब 6 बजे बेटे की मौत की सूचना मिली।
बिलासपुर पहुंची CBI की चार सदस्यीय टीम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 15 अगस्त को CBI की टीम बिलासपुर पहुंची थी। SP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइंस थाने से केस डायरी और अन्य जरूरी रिकॉर्ड जुटाए। इसके बाद टीम ने सेंट्रल जेल पहुंचकर जेल अधीक्षक और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की।
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13 अक्टूबर से पहले CBI को देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया है। अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी।
अब किस पर टिकेगी जांच की नजर?
CBI की जांच में अब यह अहम होगा कि श्रवण को हिरासत में लिए जाने से लेकर जेल पहुंचने, तबीयत बिगड़ने और सिम्स में मौत तक वास्तव में क्या-क्या हुआ। सिर में चोट कैसे लगी, चोट किन परिस्थितियों में आई और उस दौरान कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी मौजूद थे—इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।




















