Naresh Bhagoria
26 Jan 2026
बीजापुर। नक्सल हिंसा से लंबे समय तक प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सुदूर और अंदरूनी इलाकों में 77वें गणतंत्र दिवस 2026 को लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक बनते हुए पहली बार शान से तिरंगा फहराया गया। नवीन स्थापित सुरक्षा कैंपों में सुरक्षा बलों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने एक साथ ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय पर्व मनाया। जिन इलाकों में कभी नक्सली भय के चलते राष्ट्रीय पर्व मनाना असंभव था, वहां अब शांति और सुरक्षा के माहौल में गणतंत्र दिवस का आयोजन हुआ।
बीजापुर के जिन गांवों पर दशकों तक माओवादी उग्रवाद की छाया रही, वहां इस बार प्रभात फेरियां निकलीं और “वंदे मातरम” तथा “जय हिंद” के नारे गूंजे। नवीन सुरक्षा कैंपों में आयोजित कार्यक्रमों में ग्रामीणों और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र में भरोसा और लोकतांत्रिक चेतना फिर से मजबूत हो रही है।
केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति के तहत 15 अगस्त 2025 के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 31 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। इन कैंपों ने दुर्गम इलाकों में सुरक्षा और प्रशासन की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित की है। इसका सीधा असर यह हुआ कि इन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ी।
इस वर्ष बीजापुर जिले के 31 ऐसे गांव गणतंत्र दिवस के आयोजन से जुड़े, जहां पहले राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी संभव नहीं था। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर उत्साहपूर्वक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह परिवर्तन उन अंचलों में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का सशक्त संकेत है, जहां लंबे समय तक सामान्य जनजीवन बाधित रहा।
सुरक्षा कैंपों की स्थापना से न केवल शांति बहाल हुई है, बल्कि विकास कार्यों को भी गति मिली है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं अब धीरे-धीरे ग्रामीणों तक पहुंचने लगी हैं। इससे स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है।
सुरक्षा बलों और प्रशासन की सतत मौजूदगी से उन क्षेत्रों में भी राष्ट्रीय पर्व मनाने का उत्साह देखने को मिला, जहां पहले इस पर रोक थी। ग्रामीणों की बढ़ती सहभागिता यह दर्शाती है कि बीजापुर अब माओवाद के भय से बाहर निकलकर शांति, लोकतंत्र और विकास की राह पर अग्रसर है।
गणतंत्र दिवस 2026 पर बीजापुर के अंदरूनी गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का प्रतीक है। यह बदलाव क्षेत्र के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में विकास और स्थायित्व की मजबूत नींव रखेगा।