छग शराब घोटाले में 183 करोड़ का भुगतान, कर्मचारियों के हाथ खाली,5 कंपनियों पर रकम हड़पने का आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में ACB-EOW ने मैनपावर भुगतान से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने 182.98 करोड़ रुपये के कथित अतिरिक्त भुगतान मामले में CSMCL के पूर्व प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ छठा पूरक चालान पेश किया है। आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान लिया गया, लेकिन कर्मचारियों को यह रकम नहीं मिली। मामले में कुल 42 लोगों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
182.98 करोड़ के भुगतान पर सवाल, पांच कंपनियां जांच के घेरे में
ACB-EOW की जांच के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच पांच मैनपावर कंपनियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और संबंधित सेवा शुल्क के नाम पर कुल 182.98 करोड़ रुपये का कथित अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनियों ने कर्मचारियों को उनके नाम पर स्वीकृत अतिरिक्त राशि दिए बिना या अधिक रकम के बिल बनाकर निगम से भुगतान प्राप्त किया। जांच के दौरान कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। एजेंसी के मुताबिक, कर्मचारियों ने सामान्य मासिक वेतन मिलने, लेकिन उनके नाम पर अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलने की बात कही है। भुगतान के रिकॉर्ड, कंपनी दस्तावेज, बैंक संबंधी कागजात और कथित कमीशन लेन-देन से जुड़े साक्ष्य चालान में शामिल किए गए हैं।
त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान का आरोप
अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 16 अप्रैल 2023 तक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के प्रबंध संचालक थे। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके कार्यकाल में पांचों कंपनियों को लगभग 152.40 करोड़ रुपये का कथित अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ओवरटाइम के करीब 82.66 करोड़ रुपये, बोनस के 12.21 करोड़ रुपये, चार अतिरिक्त दिनों के काम के 45.02 करोड़ रुपये और सेवा शुल्क के 12.51 करोड़ रुपये शामिल हैं। ACB-EOW का आरोप है कि निविदा की शर्तों में बदलाव कर कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था बनाई गई। एजेंसी ने इस प्रक्रिया में कथित कमीशन दिए जाने का भी आरोप लगाया है।

28 से 32 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, मैनपावर कंपनियों से कथित नकद कमीशन एकत्र कर अरुणपति त्रिपाठी तक पहुंचाने में सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका की जांच की गई है। एजेंसी का दावा है कि कंपनियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आने की बात सामने आई। ACB-EOW ने त्रिपाठी पर अपने कार्यकाल के दौरान लगभग 28 से 32 करोड़ रुपये कमीशन लेने और उसे अनवर ढेबर तक पहुंचाने का आरोप लगाया है। जांच में अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच सुमीत फैसिलिटीज की ओर से करीब 15.65 करोड़ रुपये दिए जाने से संबंधित जानकारी भी शामिल है। इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई होनी है।
संबंधित खबर: शराब घोटाले के आरोपी काग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के ठिकाने पर ED की दबिश ,दस्तावेज खंगाल रही टीम
ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को 48.08 करोड़ रुपये का भुगतान
ACB-EOW के अनुसार, बीआर लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी थी। आरोप है कि कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के काम के बिल तैयार कर निगम से भुगतान लिया गया, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को पूरी रकम नहीं दी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों कंपनियों को कुल 48.08 करोड़ रुपये का कथित अतिरिक्त भुगतान मिला। इसमें से लगभग 38.32 करोड़ रुपये त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान दिए गए थे।
28.80 लाख रुपये के कथित कमीशन का भी जिक्र
चालान के अनुसार, 29 नवंबर 2023 को ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज के लंबित बिल पास कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को करीब 28.80 लाख रुपये कमीशन दिए जाने की बात सामने आई। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस उद्देश्य से दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक रायपुर भेजा गया था। रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालय खर्च के लिए रखे गए और 28.80 लाख रुपये कथित कमीशन के लिए अलग किए गए। एजेंसी के अनुसार, रकम पहुंचाने जा रहे कंपनी कर्मचारियों के पास से ED की कार्रवाई के दौरान यह राशि बरामद हुई थी।
संबंधित खबर: Bilaspur News: शराब घोटाले में अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, राज्य से बाहर रहने की शर्त
आंगड़िया नेटवर्क से करोड़ों रुपये भेजने का आरोप
ACB-EOW ने चालान में कथित अवैध रकम को आंगड़िया नेटवर्क के जरिए मुंबई और हैदराबाद भेजे जाने से संबंधित बयान भी शामिल किए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, महमूद अहमद खान ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच पी. विजय कंपनी तक लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये पहुंचाने की बात कही। एजेंसी के अनुसार, यह रकम अरुणपति त्रिपाठी की बताई गई थी। जांच में यह आरोप भी शामिल है कि त्रिपाठी से जुड़ी कथित अवैध रकम को बेंगलुरु की पेंथियान बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संपत्तियों में निवेश किया गया। चालान के मुताबिक, इस रकम में से तीन करोड़ रुपये ED ने जब्त किए हैं।
त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में, लोहिया के खिलाफ गैरहाजिरी में चालान
अरुणपति त्रिपाठी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, बीआर लोहिया विदेश में हैं और नोटिस के बाद भी पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उनके खिलाफ फरारी पंचनामा तैयार कर चालान पेश किया गया। एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी होने और आगे की कार्रवाई के लिए इंटरपोल का सहयोग लेने की बात भी कही है। बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी के मुताबिक, इस मामले में कुल 42 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चालान पेश होने के बाद अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को निर्धारित होने की जानकारी दी गई है।
संबंधित खबर: CG NEWS: शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाईकोर्ट की जमानत बरकरार, ED-ACB की याचिका खारिज
3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में 10वां चालान
इसी दिन शराब घोटाले के एक अन्य बड़े मामले में ACB-EOW ने 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों व कंपनियों के खिलाफ दसवां चालान पेश किया। लगभग 27 हजार पन्नों के दस्तावेजों के साथ चालान रायपुर की विशेष अदालत में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित शराब सिंडिकेट ने आबकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध कमीशन वसूला। आरोप है कि बिना आबकारी शुल्क चुकाए अतिरिक्त शराब तैयार कराई गई और डुप्लीकेट होलोग्राम, अतिरिक्त खाली बोतलों तथा फर्जी परिवहन परमिट के जरिए सरकारी दुकानों तक पहुंचाई गई। एजेंसी का दावा है कि इस शराब की बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होती थी और इससे प्राप्त नकदी सिंडिकेट तक पहुंचाई जाती थी।
हवाला, दुबई और संपत्तियों में निवेश की जांच
दसवें चालान में कथित अवैध रकम को हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग शहरों तथा दुबई तक पहुंचाने के आरोप भी शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, नकदी के बदले बैंक खातों में एंट्री लेकर रकम को असुरक्षित ऋण के रूप में दिखाया गया और बाद में जमीन सहित अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया। चालान में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान रायपुर के सिलतरा स्थित एन.व्ही. डिस्टिलरी में नए उत्पादन और पहले से रखी शराब की होटल-बार के माध्यम से कथित अवैध बिक्री से संबंधित साक्ष्यों का भी उल्लेख है। इसके अलावा बीआर लोहिया और कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में चालान पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
संबंधित खबर: CG NEWS: बलौदाबाजार में ACB-EOW की बड़ी रेड: शराब कारोबारी के घर छापा, कई अहम दस्तावेज जब्त
आगे जांच में क्या?
182.98 करोड़ रुपये के कथित अतिरिक्त मैनपावर भुगतान मामले और 3200 करोड़ रुपये के बताए जा रहे शराब घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ACB-EOW की जांच और चालान में शामिल आरोपों का परीक्षण अदालत में होगा। सभी आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध होना अभी न्यायिक निर्णय पर निर्भर है। मामले में आगे की जांच और सुनवाई पर नजर बनी हुई है।




















