CG NEWS: छत्तीसगढ़ में हीरों का खजाना! अब होगी मेगा ड्रिलिंग, महासमुंद में खुल सकती है देश की नई डायमंड माइन

PREM KUMAR,RAIPUR। छत्तीसगढ़ की धरती में छिपे हीरों के खजाने की तलाश अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास (Large Diameter) की ड्रिलिंग को मंजूरी मिल गई है। नई दिल्ली में हुई एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के बोर्ड की बैठक में इस अहम फैसले पर मुहर लगी। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से हीरों के वास्तविक भंडार का आकलन किया जाएगा, जिससे भविष्य में देश की नई व्यावसायिक हीरा खदान विकसित होने की संभावना और मजबूत हो गई है।
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जहां मिले थे हीरे, वहीं अब होगा बड़ा सर्वे
महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में पहले से ही किम्बरलाइट पाइप की पहचान हो चुकी है, जिसे हीरों का प्रमुख स्रोत माना जाता है। अब इस क्षेत्र में बड़े व्यास की ड्रिलिंग कर यह पता लगाया जाएगा कि जमीन के भीतर हीरे का वास्तविक भंडार कितना है और व्यावसायिक खनन कितना लाभकारी होगा।
बोर्ड बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
नई दिल्ली में आयोजित एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के निदेशक मंडल की बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। बोर्ड ने निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी और वैज्ञानिक कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं ताकि परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो।
ड्रिलिंग के बाद बनेगी फिजिबिलिटी रिपोर्ट
लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप से नमूने निकालकर वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी। यदि रिपोर्ट सकारात्मक रही तो बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इन अधिकारियों की मौजूदगी में बनी रणनीति
बैठक में एनसीएल के निदेशक अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल सहित उपेंद्र कुमार और विनय कुमार मौजूद रहे।
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छत्तीसगढ़ को मिल सकती है नई पहचान
यदि बलौदा-बेलमुंडी परियोजना सफल होती है तो छत्तीसगढ़ केवल लौह अयस्क, कोयला और बॉक्साइट ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों में भी शामिल हो सकता है। इससे राज्य में निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर पैदा होंगे।












