विदेशों से उठी आजादी की आवाज, शौर्य स्मारक में डिजिटल गैलरी ने दिखाई प्रवासी सेनानियों की कहानी

भारत की आजादी की लड़ाई सिर्फ देश की सीमाओं के भीतर नहीं लड़ी गई थी। विदेशों में रहने वाले भारतीयों और भारत के समर्थन में खड़े विदेशी लोगों ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से भोपाल के शौर्य स्मारक में ‘प्रवासी सेनानी वीथि’ तैयार की गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस डिजिटल प्रदर्शनी गैलरी का लोकार्पण किया। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहे। स्वराज संस्थान संचालनालय की ओर से तैयार इस डिजिटल गैलरी को 18 अलग-अलग खंडों में बांटा गया है। यहां महात्मा गांधी के अफ्रीका प्रवास से लेकर स्वामी विवेकानंद के शिकागो धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक व्याख्यान, लंदन के इंडिया हाउस, गदर आंदोलन, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से जुड़ी घटनाओं को डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

इतिहास को डिजिटल अनुभव के जरिए समझने का प्रयास
प्रवासी सेनानी वीथि में आजादी के आंदोलन से जुड़े कई ऐसे पहलुओं को प्रदर्शित किया गया है जिनमें विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भूमिका सामने आती है। गैलरी में ‘एशियाई देशों में प्रतिरोध’, ‘प्रवासी के साथ सेल्फी’, ‘आपके समरूप प्रवासी’, ‘मित्र’ और ‘विश्वव्यापी अनुयायी’ जैसे सेक्शन भी बनाए गए हैं। लोकार्पण के पहले ही दिन बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनी देखने पहुंचे। युवाओं ने अलग-अलग डिजिटल सेक्शन को देखा और सेल्फी लेकर इस ऐतिहासिक अनुभव को अपने साथ जोड़ा। इस तरह तकनीक के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन की घटनाओं को नई पीढ़ी के लिए ज्यादा रोचक और संवादात्मक बनाने की कोशिश की गई है।
इंडिया हाउस-लंदन बना खास आकर्षण
गैलरी में इंडिया हाउस-लंदन की कहानी भी प्रमुखता से प्रदर्शित की गई है। लंदन के हाईगेट स्थित इंडिया हाउस की स्थापना श्यामजी कृष्ण वर्मा ने 1 जुलाई 1905 को की थी। यह केंद्र विदेश में रहकर भारत की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले कई क्रांतिकारियों की गतिविधियों का प्रमुख स्थान बना। यहां विनायक दामोदर सावरकर, मदनलाल ढींगरा, मैडम भीकाजी कामा और लाला हरदयाल जैसे क्रांतिकारियों से जुड़ी गतिविधियों और योगदान को प्रदर्शित किया गया है।
गदर आंदोलन की कहानी भी दिखाई
प्रदर्शनी में गदर आंदोलन से जुड़े दस्तावेज और सामग्री भी प्रदर्शित की गई है। गदर क्रांतिकारियों ने भारत में विद्रोह की भावना फैलाने के लिए अलग-अलग भाषाओं में परचे और क्रांतिकारी साहित्य प्रकाशित और वितरित किया था। गैलरी की एक पूरी वॉल पर इसी तरह के साहित्य और आंदोलन से जुड़ी सामग्री को प्रदर्शित किया गया है। गदर पार्टी ने अमेरिका और कनाडा में अपने नेटवर्क के जरिए भारत की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार करने में भूमिका निभाई थी।
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विदेशी मित्रों के योगदान को भी जगह
भारत की आजादी की लड़ाई में सिर्फ प्रवासी भारतीय ही नहीं बल्कि कई विदेशी हस्तियों ने भी समर्थन दिया था। गैलरी के ‘मित्र’ सेक्शन में ऐसे ही लोगों के योगदान को सामने लाया गया है। इसमें एनी बेसेंट, तोसिको सोमा, हेनरी कॉटन, अल्फ्रेड वेब, डेविड गार्नेट, एनी मेरी, बेरियन एल्बिश और मायरोन फ्लेप्स जैसी विदेशी हस्तियों से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की गई है।
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विभाजन की त्रासदी भी डिजिटल प्रदर्शनी का हिस्सा
शौर्य स्मारक में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस से जुड़ी गैलरी भी लगाई गई है। इसमें 1947 के विभाजन की त्रासदी को तस्वीरों और उस समय की अखबारी खबरों के जरिए दिखाया गया है। ट्रेनों और बसों के जरिए बड़े पैमाने पर पलायन, भूखमरी, विस्थापन और अपने जीवन को बचाने के लिए संघर्ष करते लोगों की तस्वीरें उस दौर की मानवीय पीड़ा को सामने रखती हैं। इस प्रदर्शनी के जरिए आजादी के साथ जुड़े उस कठिन दौर को भी नई पीढ़ी के सामने रखने का प्रयास किया गया है ताकि स्वतंत्रता के संघर्ष और उसके बाद हुए विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझा जा सके। ‘प्रवासी सेनानी वीथि’ इस मायने में खास है कि यह स्वतंत्रता आंदोलन को केवल भारत के भीतर की कहानी के रूप में नहीं बल्कि विदेशों में उठी उन आवाजों के साथ दिखाती है, जिन्होंने भारत की आजादी के संघर्ष को समर्थन और ताकत दी।












