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PU Special :राष्ट्रप्रेम की मिसाल-25 साल से तिरंगे की सिलवटें मिटा रहे कटनी के रमेश रजक

कटनी के 60 वर्षीय रमेश रजक पिछले 25 वर्षों से बिना किसी पारिश्रमिक के राष्ट्रीय ध्वज की सेवा कर रहे हैं। वे सरकारी संस्थानों और स्कूलों से तिरंगे एकत्र कर उन्हें श्रद्धा से धोते, प्रेस करते और सम्मानपूर्वक निर्धारित स्थानों तक पहुंचाते हैं। उनके लिए तिरंगा देश के 140 करोड़ नागरिकों का गौरव और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है।
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राष्ट्रप्रेम की मिसाल-25 साल से तिरंगे की सिलवटें मिटा रहे कटनी के रमेश रजक
कटनी। रमेश रजक राष्ट्रध्वज पर प्रेस करते हुए।

कटनी। देशभक्ति सिर्फ सीमा पर खड़े होकर बंदूक थामने का नाम नहीं है; यह वह भाव है, जिसमें इंसान राष्ट्र की आन-बान-शान के लिए खुद को समर्पित कर दे। कटनी के 60 वर्षीय रमेश रजक पिछले 25 वर्षों से बिना किसी पारिश्रमिक के राष्ट्रीय ध्वज की नि:स्वार्थ सेवा कर इसी सच्ची राष्ट्रभक्ति का संदेश दे रहे हैं।

राष्ट्रध्वज 140 करोड़ भारतीयों का गौरव

रमेश रजक ने बताया, 'जब मेरे हाथों में तिरंगा होता है, तो वह महज कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का गौरव होता है। इसकी पवित्रता और गरिमा बनाए रखना ही मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा संकल्प है।'

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कर्मठ बने रहने की मिलती है प्रेरणा

रमेश शहर के कलेक्ट्रेट, नगर निगम, सरकारी अस्पताल और विभिन्न स्कूलों से राष्ट्रीय ध्वज लाकर उन्हें पूरी श्रद्धा से धोते हैं, गर्म प्रेस से उनकी सिलवटें दूर करते हैं और फिर सम्मानपूर्वक तय स्थानों तक पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि तिरंगे के तीन रंग-त्याग, शांति और समृद्धि-उन्हें हर दिन कर्मठ बने रहने की प्रेरणा देते हैं। बिना किसी प्रचार और पदक की चाह के ढाई दशक से जारी उनकी यह अनवरत सेवा सिखाती है कि सच्ची नीयत हो तो इंसान अपने काम से भी राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान दे सकता है।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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