CG NEWS:देश में अब सिर्फ एक इमरजेंसी नंबर! 112 पर मिलेगा हर संकट का समाधान, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

RAIPUR NEWS। देश में अब किसी भी आपात स्थिति में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को डायल-112 में एकीकृत किया जाए। इस फैसले का उद्देश्य सड़क हादसों, अपराध, आग और मेडिकल इमरजेंसी में सहायता पहुंचाने का समय कम करना है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में डायल-112 पहले से संचालित है, जिसे अब और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
देशभर में लागू होगा 'वन नेशन-वन इमरजेंसी नंबर
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज और त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देशभर में एकीकृत इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पुलिस, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सहित सभी आपातकालीन सेवाएं अब एक ही नंबर-112 से संचालित होंगी।
तीन महीने में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों को डायल-112 से जोड़कर एकीकृत व्यवस्था लागू करें। राज्यों से समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।
CG और MP में पहले से सक्रिय है डायल-112
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में डायल-112 पहले से संचालित है। छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत 15 अगस्त 2018 को "एक्के नंबर, सब्बो बर" थीम के साथ हुई थी। वर्तमान में प्रदेश के सभी 33 जिलों में यह सेवा उपलब्ध है।
रायपुर में शुरू हुई तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ गृह विभाग ने इमरजेंसी सेवाओं के पूर्ण एकीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों की बैठक में विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि पुलिस, मेडिकल और फायर सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित हो सकें।
कैसे करेगा काम नया सिस्टम?
डायल-112 पर कॉल आते ही कंट्रोल रूम घटना और लोकेशन दर्ज करेगा। यदि मामला मेडिकल इमरजेंसी का होगा तो सूचना सीधे 108 एम्बुलेंस सेवा तक पहुंचेगी। आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड और कानून-व्यवस्था की स्थिति में पुलिस तुरंत अलर्ट होगी। सभी सेवाओं के एक प्लेटफॉर्म पर आने से सूचना ट्रांसफर में लगने वाला समय लगभग समाप्त हो जाएगा।
रोजाना हजारों कॉल संभाल रहा है सिस्टम
20 मई से 16 जून 2026 के बीच
कुल अटेंड कॉल : 3,06,264,
कुल रजिस्टर्ड इवेंट : 79,782
औसतन प्रतिदिन करीब 10 हजार कॉल डायल-112 के जरिए प्राप्त हो रही हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया यह आदेश?
26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने माना कि देरी से सहायता मिलने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
सभी इमरजेंसी नंबरों को डायल-112 में मर्ज किया जाए।
सड़क हादसा पीड़ितों को कैशलेस इलाज मिले।
गुड सेमेरिटन कानून का प्रभावी पालन हो।
सभी एम्बुलेंस में GPS और VLTD अनिवार्य हो।
पैरामेडिक्स का मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए।
ट्रॉमा सेंटरों की ग्रेडिंग और ट्रॉमा रजिस्ट्री तैयार की जाए।
बहुभाषी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।
राज्यों से समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट ली जाए।
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क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी। किसी भी आपात स्थिति में केवल डायल-112 करने पर संबंधित विभाग स्वतः सक्रिय हो जाएगा। इससे रेस्पॉन्स टाइम कम होगा और दुर्घटनाओं व गंभीर परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।












