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PU Special :हथियार छोड़कर सीखा हुनर; अब ड्राइविंग,प्लंबरिंग और आधुनिक खेती करेंगे सरेंडर कर चुके नक्सली

 छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की राह छोड़कर मुख्यधारा में लौटे युवा अब जिंदगी की नई इबारत लिख रहे हैं। कोई ड्राइविंग, कोई प्लंबर का काम कोई आधुनिक खेती सीख रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब तक 2959 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। राज्य सरकार इनमें से 1817 को विभिन्न विधाओं की ट्रेनिंग दे रही है।  
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हथियार छोड़कर सीखा हुनर; अब ड्राइविंग,प्लंबरिंग और आधुनिक खेती करेंगे सरेंडर कर चुके नक्सली
बस्तर में मिस्त्री के काम का प्रशिक्षण लेते सरेंडर कर चुके नक्सली।

कृष्णा तिवारी, रायपुर।  प्रदेश को इस साल 31 मार्च को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया। इस दौरान हजारों नक्सलियों ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन जीने का संकल्प लिया। सरकार योजनाओं में शामिल होकर तकरीबन 1817 नक्सलियों ने आधुनिक कृषि, ड्राइविंग, प्लंबर और सिलाई कड़ाई, बुनाई जैसे हुनर सीखे हैं। यही नहीं प्रशिक्षण लेने के बाद ये आदिवासी पूर्व नक्सली अब अन्य ग्रामीणों के साथ सामान्य जीवन भी जी रहे हैं। गौरतलब है कि नक्सल विरोधी अभियान के तहत अब तक 1 दिसंबर 2023 से अब तक 2959 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

प्लंबर का काम सीखा, खेती भी कर रहे

नारायणपुर जिले के बखरूपारा के लाइवलीहुड ग्राउंड में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले आत्मसमर्पित नक्सली 45 वर्षीय केसरी गावड़े नए जीवन से बहुत खुश हैं। वे बताते हैं कि  यहां प्लंबर की ट्रेनिंग कर ली है। अब इस काम के साथ खेत में मेहनत-मजदूरी करेंगे। वहीं ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेने वाले कोहका मेटा गांव के 27 वर्षीय रामू कोर्राम कहते हैं कि मेरा शौक ही गाड़ी वाहन चलाना था। उसी की ट्रेनिंग ली है। अब गांव जाकर आमदनी के लिए काम करेंगे। 

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सरकार यह दे रही सुविधाएं 

छत्तीसगढ़ सरकार नक्सली के पुनर्वासितों को प्रशिक्षण के अलावा उनके आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड, बैंक खाता, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वोटर आई कार्ड, जॉब कार्ड और वनाधिकार पट्टा भी उनकी सुविधाओं के लिए तैयार करवाया जा रहा है। यही नहीं पुनर्वासितों को नई दुनिया और लोगों से जुड़ाव के लिए 776 लोगों को स्मार्ट फोन वितरित किए गए। साथ ही 1160 लोगों को टूल किट दी गई। 

अब बेहद अच्छा लग रहा है

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नक्सल गैंग में हर समय पर डर और मौत का खतरा बना रहता था। नक्सलवाद में डीवीसीएम के रूप में 17 साल रहा हूं। अब यहां आकर बेहद अच्छा महसूस कर रहा हूं। टैक्सी ड्राइवर की ट्रेनिंग ली है। अब साधारण जीवन जिएंगे। 

मंगतू राम वडदा, आत्मसमर्पित नक्सली, गट्टाघर गांव

तीन महीने की ट्रेनिंग हुई

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नल मिस्त्री का प्रशिक्षण लिया है। यह ट्रेनिंग तीन महीने की हुई है। यहां रहकर और नया काम सीखकर अच्छा लग रहा है। अब गांव जाएंगे तो अपनों के साथ नल का काम, खेती कार्य करेंगे। साधारण जीवन आम लोगों की तरह व्यतीत करेंगे। 

मूंगड़ी वंडारी, आत्मसमर्पित नक्सली 

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 अब शांति से जीवन जीएंगे 

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आत्मसमर्पण के बाद यहां का माहौल नक्सलवाद से बिल्कुल अलग है। यहां अच्छा महसूस कर रहे हैं। अब डर भी महसूस नहीं होता है। दो महीने की प्लंबर की ट्रेनिंग कर ली है। अब शांति से जीवनयापन करेंगे। 

रमशीला सलाम, आत्मसमर्पित नक्सली

प्लंबर की ट्रेनिंग से बढ़ाएंगे आय

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प्रशिक्षण ले लिया है अब प्लंबर के काम से आय बढ़ाने का काम करेंगे। इसके अलावा मजदूरी भी आती है। इससे भी अब यहां अच्छे से जीवन का गुजारा करेंगे। 

कांति हलामी, आत्मसमर्पित नक्सली

कुछ लोग प्रशिक्षण लेकर गांव चले गए

जिसका प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। वह अपने गांव वापस चले गए हैं। कुछ आत्मसमर्पित नक्सलियों को अभी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आया है। शांति का माहौल है। रुचि के आधार पर स्वरोजगार के गुर सीख रहे हैं। गांव में लोगों के बीच रह रहे हैं। इससे भी किसी को कोई परेशानी नहीं हो रही है।

बीएन मीणा, आईजी बस्तर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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