PU Special :बीमारी से आजादी-1947 में एक सरकारी अस्पताल से शुरू हुआ भोपाल का सफर, अब छह मेडिकल कॉलेज और हार्ट ट्रांसप्लांट-रोबोटिक सर्जरी तक पहुंचा शहर

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। जब देश आजाद हुआ तक शहर में इलाज का मतलब सुल्तानिया जनाना अस्पताल तक सीमित था। शहर में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का यही प्रमुख सहारा था और गंभीर बीमारी होने पर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। आजादी के 79 साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जिस भोपाल में कभी एक सरकारी अस्पताल था, वहां अब छह मेडिकल कॉलेज और एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान हैं। यहां कैंसर के उन्नत इलाज से लेकर किडनी और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी जटिल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। रोबोटिक सर्जरी भी जल्द इस सूची में जुड़ने वाली है।
अब डॉक्टर-विशेषज्ञ तैयार करने का बड़ा केंद्र
शहर अब सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं रहा, बल्कि डॉक्टर और विशेषज्ञ तैयार करने का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां 6 मेडिकल कॉलेज शहर सीमा में और दो शहर सीमा से सटे हुए हैं। यहां हर साल 1900 डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। दो नए मेडिकल कॉलेज और आने वाले जिससे मेडिकल शिक्षा का दायरा और बढ़ेगा। यही वजह है कि इलाज की तलाश में अब मरीज सिर्फ आसपास के जिलों से नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से भी भोपाल पहुंच रहे हैं। 1947 का एक अस्पताल आज आधुनिक चिकित्सा और मेडिकल शिक्षा के बड़े हब में बदल चुका है।
1947 से 2026 का सफर : ऐसे बदला भोपाल का हेल्थ सिस्टम
1947 में भोपाल की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था सुल्तानिया जनाना अस्पताल तक सीमित थी। इसके बाद 1950 के दशक में हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा सेवाओं और मेडिकल शिक्षा का विस्तार किया। समय के साथ निजी अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी सेंटर जुड़े। 2018 में एम्स भोपाल ने आधुनिक चिकित्सा का नया अध्याय जोड़ा। अब शहर में ट्रांसप्लांट, एडवांस्ड कैंसर ट्रीटमेंट और जटिल कार्डियक सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगले चरण में रोबोटिक सर्जरी जैसी तकनीकें भी जुड़ने वाली हैं।
एक शहर, 10 मेडिकल कॉलेज
भोपाल में अब छह मेडिकल कॉलेजों के जरिए मेडिकल शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है। गांधी मेडिकल कॉलेज, एम्स भोपाल और निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज मिलकर हर साल बड़ी संख्या में एमबीबीएस और पीजी डॉक्टर तैयार कर रहे हैं। दो कॉलेज शहर सीमा से सटे हुए हैं, इसके अलावा दो नए मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं। इनके साथ ही राजधानी भोपाल देश के चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां 10 मेडिकल कॉलेज हैं। इसका असर सिर्फ डॉक्टरों की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विशेषज्ञ सेवाओं और अस्पतालों में इलाज की क्षमता भी बढ़ेगी।
हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद अब लंग्स की तैयारी
कभी भोपाल में सिर्फ सर्दी खांसी जैसी सामान्य बीमारियों का ही इलाज संभव था, लेकिन अब स्थिति इससे उलट है। शहर में किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट ट्रांसप्लांट ही नहीं न्यूरोसर्जरी और एडवांस्ड कैंसर सर्जरी की जा रही है। रेडिएशन और आधुनिक कैंसर तकनीक के साथ ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं का विस्तार हुआ है। आने वाले समय में रोबोटिक सर्जरी भी इस सूची में जुड़ने वाली है।
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इलाज के लिए अब बाहर नहीं, बाहर से भोपाल
भोपाल की पहचान अब सिर्फ मध्यप्रदेश के मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रही। आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं बढ़ने के साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों से मरीज यहां पहुंच रहे हैं। ट्रांसप्लांट, कैंसर, हृदय रोग और न्यूरो संबंधी जटिल इलाज के लिए भी मरीज भोपाल के बड़े अस्पतालों पर भरोसा कर रहे हैं। कुछ अस्पतालों में विदेशों से आने वाले मरीजों का इलाज भी हो रहा है। इससे भोपाल की मेडिकल इकोनॉमी और स्वास्थ्य पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
डॉ. एसके सक्सेना, पूर्व अधीक्षक, जेपी अस्पताल
1947 से 2026: ऐसे बढ़ा भोपाल का मेडिकल सफर
- 1947-भोपाल में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख आधार सुल्तानिया जनाना अस्पताल।
- 1950 का दशक-गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के विस्तार से मेडिकल शिक्षा व इलाज को नई दिशा।
- 1980से 90 का दशक-शहर में निजी अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शुरू।
- 2000 के बाद-कार्डियक, न्यूरो, कैंसर और अन्य सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का तेजी से विस्तार।
- 2018 -एम्स भोपाल शुरू होने के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा और मेडिकल रिसर्च को नई गति।
- 2020 से 25-किडनी व हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी जटिल चिकित्सा सेवाओं का विस्तार।
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इनका इंतजार
1-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ऑथोर्पेडिक्स
हड्डी से जुड़ी समस्याओं के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ऑथोर्पेडिक्स की शुरूआत की जाएगी। यहां रोबोटिक सर्जरी से लेकर कम्प्यूटर नेविगेशन से सर्जरी करने तक की तकनीक मोजूद होगी। प्रदेश के पहले स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर की शुरूआत होगी।
2-रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिसीज
इस सेंटर में लंग्स ट्रांसप्लांट के साथ फेफड़ों के कैंसर की जांच की भी सुविधा होगी। इसके अलावा श्वसन से बीमारियों पर रिसर्च की जा सकेगी। लंग्स ट्रांसप्लांटकी भी सुविधा होगी।
3-एनसीडीसी का पहला रीजनल सेंटर
नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) का पहले रीजनल सेंटर में संक्रामक बीमारियों की समय से पहचान की जाएगी। जिससे समय से रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें। जेई, सीसीएचएफ स्क्रब टाइफस, सार्स, एच1एन1, इबोला जैसे वायरस की जांच के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग के साथ शोध की व्यवस्था होगी।













