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CG NEWS: 36 साल से अटकी देवभोग हीरा खदान परियोजना को मिलेगी रफ्तार, हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई चाहती है छत्तीसगढ़ सरकार।

23 साल पुराने कानूनी विवाद को खत्म करने की तैयारी, व्यावसायिक खनन शुरू होते ही अरबों के राजस्व और हजारों रोजगार की उम्मीद राज्य सरकार ने देवभोग हीरा खदान परियोजना से जुड़े करीब 23 साल पुराने कानूनी विवाद को समाप्त कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत हाईकोर्ट बिलासपुर में अर्जेंट हियरिंग की याचिका दायर करने की तैयारी शुरू हो गई है,
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36 साल से अटकी देवभोग हीरा खदान परियोजना को मिलेगी रफ्तार, हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई चाहती है छत्तीसगढ़ सरकार।

PREM KUMAR RAIPUR। छत्तीसगढ़ सरकार ने गरियाबंद जिले के देवभोग हीरा खदान परियोजना को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। करीब 36 वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक विवादों में फंसी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अब सरकार हाईकोर्ट बिलासपुर में जल्द सुनवाई (Urgent Hearing) की मांग करने जा रही है। यदि मामला सुलझता है तो राज्य को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व, बड़े निवेश और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

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हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई की तैयारी

राज्य सरकार ने देवभोग हीरा खदान परियोजना से जुड़े करीब 23 साल पुराने कानूनी विवाद को समाप्त कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत हाईकोर्ट बिलासपुर में अर्जेंट हियरिंग की याचिका दायर करने की तैयारी शुरू हो गई है, ताकि लंबे समय से अटकी परियोजना को जल्द धरातल पर उतारा जा सके।

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36 साल से इंतजार में देवभोग की हीरा बेल्ट

गरियाबंद के मैनपुर-देवभोग क्षेत्र में वर्ष 1989 के आसपास हीरों के बड़े भंडार मिलने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद कई भू-वैज्ञानिक सर्वे हुए, लेकिन कानूनी विवादों और प्रशासनिक अड़चनों के कारण व्यावसायिक खनन आज तक शुरू नहीं हो सका।

1999 में मिला था सर्वे का अधिकार

वर्ष 1999 में अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार ने मुंबई की **बी विजय कुमार एंड कंपनी** को लगभग 4,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हीरा खोज (पूर्वेक्षण) की अनुमति दी थी। कंपनी ने विश्व प्रसिद्ध हीरा कंपनी **डी बीयर्स** के साथ मिलकर सर्वे शुरू किया, लेकिन वर्ष 2001 में तत्कालीन अजीत जोगी सरकार ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अनुमति निरस्त कर दी। इसके बाद मामला माइंस ट्रिब्यूनल से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

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दुनिया की कंपनियों की नजर, अवैध खनन का खतरा

पायलीखंड, बेहराडीह, कोदोमाली और जांगड़ा क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली किम्बरलाइट चट्टानों की मौजूदगी ने देश-विदेश की कई खनन कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं लटापारा और सेंमुड़ा क्षेत्र में दुर्लभ रत्न अलेक्जेंडराइट मिलने की पुष्टि भी हो चुकी है। लंबे समय तक खनन शुरू नहीं होने से इन क्षेत्रों में अवैध उत्खनन और तस्करी का खतरा लगातार बढ़ता रहा है। सरकार का मानना है कि वैध खनन शुरू होने से अवैध गतिविधियों पर भी रोक लगेगी।

महासमुंद में मिले जेम्स श्रेणी के हीरे

हाल ही में महासमुंद जिले में 200 टन बल्क सैंपल की जांच के दौरान जेम्स क्वालिटी के पांच हीरे मिलने से गरियाबंद-मैनपुर बेल्ट की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मौजूद किम्बरलाइट पाइप्स में उच्च गुणवत्ता वाले हीरे मिलने की संभावना काफी अधिक है।

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राज्य को मिलेगा बड़ा आर्थिक फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार यदि देवभोग में व्यावसायिक खनन शुरू होता है तो छत्तीसगढ़ को हर वर्ष करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके साथ ही हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। आधुनिक तकनीक और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के जरिए यह परियोजना छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय हीरा उद्योग के मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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