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गोरखपुर। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि भूमि राष्ट्र की भौतिक पहचान है और विचारधारा उसकी आत्मा। राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी विचारधारा की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित सेमिनार में उन्होंने सीमा विवाद, परमाणु हथियारों की चुनौती और बदलते युद्ध के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत आज कई सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनमें चीन के साथ सीमा विवाद सबसे गंभीर है। आज़ादी के बाद से इस मुद्दे पर कई युद्ध हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता भी चिंता का विषय है और पाकिस्तान लगातार समस्या पैदा करता रहा है।
उन्होंने बताया कि किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा को तीन स्तरों पर देखा जा सकता है- सैनिक तत्परता, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा। ये तीनों घेरे एक-दूसरे के पूरक हैं और इनका सामंजस्य ही देश को सुरक्षित रख सकता है। उन्होंने आत्मनिर्भरता को सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया और कहा कि भविष्य में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी की जरूरत पड़ सकती है।
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। नभ, जल और थल की तरह अब साइबर स्पेस भी एक नया युद्धक्षेत्र बन गया है। स्पेस सर्विलांस और एयर डिफेंस को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग का जिक्र करते हुए कहा कि तीनों सेनाओं को नए तरीकों से खुद को तैयार करना होगा।
जनरल चौहान ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, ठीक उसी तरह आतंकवाद और व्यापार भी साथ-साथ नहीं चल सकते। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और रिहर्सल का प्रतीक था और इसमें सफलता मिली।
उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ की भी चर्चा की और कहा कि यह एक मल्टी डिफेंस टूल होगा, जो हमले का जवाब देने के साथ-साथ लोगों की रक्षा भी करेगा। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और आत्मनिर्भरता से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में बचपन से ही यह शिक्षा दी जाती है कि धरती हमारी माता है और इसके साथ कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बालाकोट, उरी और पुलवामा जैसी घटनाओं के बाद भारत ने कड़े जवाब देकर दुश्मनों को उनकी सीमाओं का एहसास कराया।
CDS जनरल चौहान गोरखा वॉर मेमोरियल के सौंदर्यीकरण और गोरखा म्यूजियम के शिलान्यास समारोह में भी शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ की पूजा की और मंदिर परिसर में ही रात्रिभोज किया।