Peoples Update Special :MP के कई बाल गृहों में नियमों की अनदेखी, बालक-बालिकाएं एक ही परिसर में रहे, 18 साल के बाद भी नहीं मिली रिहाई

CAG रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के बाल देखरेख संस्थानों की गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई बाल गृहों में बालक-बालिकाएं एक ही परिसर में रहे, 18 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को वर्षों तक नहीं हटाया गया, डाइट नियमों का पालन नहीं हुआ और सुरक्षा में चूक के कारण 218 किशोर फरार हो गए।
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MP के कई बाल गृहों में नियमों की अनदेखी, बालक-बालिकाएं एक ही परिसर में रहे, 18 साल के बाद भी नहीं मिली रिहाई
MP के कई बाल गृहों में नियमों की अनदेखी

अशोक गौतम, भोपाल। मध्य प्रदेश में संचालित कई बाल देखरेख संस्थानों (CCI) में बच्चों की सुरक्षा और देखभाल से जुड़े नियमों का गंभीर उल्लंघन सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की वर्ष 2019 से 2024 की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई बाल गृहों में बालक और बालिकाओं को एक ही परिसर में रखा जा रहा था। इतना ही नहीं, 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी दर्जनों बच्चों को वर्षों तक बाल गृहों में ही रखा गया। रिपोर्ट में सुरक्षा, भोजन, आधारभूत सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

एक ही परिसर में रह रहे थे बालक और बालिकाएं

CAG रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल स्थित बाल गृह, बाल निकेतन ट्रस्ट में बालक और बालिकाओं की इकाइयां एक ही परिसर में संचालित हो रही थीं। दोनों इकाइयों के लिए भोजनालय, रसोई, रोगी कक्ष, कार्यशाला, पुस्तकालय, परामर्श कक्ष और खुला परिसर साझा था। चिकित्सा अभिलेख भी संयुक्त रूप से संधारित किए जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार 2019 से 2024 के बीच 18 वर्ष से अधिक आयु की 24 बालिकाएं और 6 बालक भी उसी परिसर में रह रहे थे जबकि दोनों इकाइयों के लिए केवल एक ही वार्डन नियुक्त था।

18 वर्ष की आयु के बाद भी वर्षों तक बाल गृह में रहे बच्चे

24 बाल देखरेख संस्थानों की जांच में पाया गया कि 3 बालक और 23 बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी बाल गृहों में रखा गया। इन बच्चों को निर्धारित समय से 51 दिन से लेकर 1,276 दिन तक अतिरिक्त अवधि तक संस्थानों में रखा गया।

शासन ने दिया जवाब

महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने जवाब में कहा कि यदि कोई बालक या बालिका शैक्षणिक सत्र के दौरान 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तो उसे सत्र समाप्त होने तक संस्था से मुक्त करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। विभाग ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर बालक और बालिकाएं एक ही परिसर में रह रहे थे।

क्या कहते हैं नियम?

नियमों के अनुसार:

  • 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद बच्चों को बाल गृह में नहीं रखा जाना चाहिए।
  • 7 वर्ष से अधिक आयु के बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग परिसर होना अनिवार्य है।

इंदौर और सिवनी में भी मिली गंभीर अनियमितताएं

इंदौर बाल गृह के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि 550 में से 363 बच्चे 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी वहीं रह रहे थे। इनमें से 39 बच्चे ऐसे गृह में थे जहां केवल 26 पलंग उपलब्ध थे, जिसके कारण दो-दो बच्चों को एक ही पलंग साझा करना पड़ रहा था। सिवनी में संप्रेषण गृह और विशेष गृह एक ही परिसर में संचालित हो रहे थे। यहां 1,358 में से 427 बच्चे 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी संस्थान में रह रहे थे। इसी तरह रीवा, सागर और अन्य जिलों में भी ऐसी स्थिति पाई गई।

सबसे अधिक समय तक बाल गृह में रहने के मामले

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक अतिरिक्त अवधि तक बाल गृह में रहने के मामले जबलपुर और सागर से सामने आए।

  • बालिका गृह जबलपुर - 1,219 दिन
  • बालिका गृह सागर - 1,276 दिन
  • बालिका गृह जबलपुर - 1,063 दिन
  • बालिका गृह जबलपुर - 964 दिन
  • सीएच बालिका गृह जबलपुर - 836 दिन

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डाइट मेन्यू का भी नहीं हुआ पालन

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अधिकांश बाल गृहों में बच्चों के भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए बनने वाली मेस समिति का गठन ही नहीं किया गया। इसके कारण निर्धारित आहार सूची के अनुसार दूध, दही, पनीर, मूंगफली, गुड़ और फलों जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री नियमित रूप से बच्चों को उपलब्ध नहीं कराई गई। शासन ने इस कमी को स्वीकार करते हुए सुधार का आश्वासन दिया है।

सुरक्षा में चूक, पांच साल में 218 किशोर फरार

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच प्रदेश के 23 बाल देखरेख संस्थानों और एक पश्चातवर्ती देखरेख गृह से 218 किशोर फरार हो गए। सबसे अधिक मामले भोपाल के बाल निकेतन ट्रस्ट और छतरपुर संप्रेषण गृह से सामने आए, जहां से 25-25 किशोर भाग गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भोपाल के बाल निकेतन ट्रस्ट में वर्ष 2022 में भर्ती एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक प्रवेश के ढाई घंटे के भीतर ही फरार हो गया। वहीं रीवा में चार बालक छत के रास्ते संस्थान से भाग निकले।

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पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड उपलब्ध नहीं

महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने जवाब में कहा कि कई संस्थानों में होमगार्ड द्वारा पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण ऐसी घटनाएं हुईं। विभाग ने बताया कि सभी बाल देखरेख संस्थानों में मेटल डिटेक्टर और स्कैनर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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