रांची में जर्जर पानी की टंकी भरभराकर गिरी! मलबे में दबकर 2 मजदूरों की मौत, NDRF ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, 3 सुरक्षित

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। कोतवाली थाना के पीछे स्थित जिला स्कूल परिसर में पुरानी जलमीनार को तोड़ने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक पूरी संरचना भरभराकर नीचे आ गिरी। मलबे की चपेट में आने से दो मजदूर दब गए। सूचना मिलते ही पुलिस, नगर निगम और बचाव दल मौके पर पहुंचा। काफी मशक्कत के बाद दोनों मजदूरों के शव बाहर निकाले गए। मृतकों की पहचान पलामू निवासी सत्या भुइयां और मैथिलीशरण महतो के रूप में हुई है। हादसे में तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टंकी तोड़ते वक्त अचानक हुआ हादसा
रांची के कोतवाली थाना के पीछे स्थित जिला स्कूल परिसर में पुरानी जलमीनार को हटाने का काम चल रहा था। बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे मजदूर टंकी के पिलर में लगी लोहे की छड़ों को काट रहे थे। इसी दौरान अचानक ढांचा हिलने लगा और देखते ही देखते पूरी जलमीनार नीचे आ गिरी। भारी मलबे की चपेट में दो मजदूर आ गए।
दो मजदूरों ने गंवाई जान
हादसे में पलामू के रहने वाले सत्या भुइयां और मैथिलीशरण महतो की मौत हो गई। सत्या का शव घटना के कुछ समय बाद ही मलबे से निकाल लिया गया था। दूसरे मजदूर को बाहर निकालने में बचाव दल को काफी समय लगा। रात करीब 10:50 बजे एनडीआरएफ की टीम ने मैथिलीशरण का शव भी बरामद कर लिया। दोनों शव पुलिस को सौंप दिए गए।
तीन लोगों को सुरक्षित निकाला
घटना के समय मौके पर मौजूद तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। हादसे की सूचना मिलते ही रांची नगर निगम की टीम और कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद जेसीबी और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। रात होने और बारिश के कारण बचाव अभियान में टीम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
40 साल पुरानी थी जलमीनार
बताया गया कि यह जलमीनार करीब 40 साल पुरानी थी और इसकी क्षमता लगभग एक लाख गैलन थी। पुरानी संरचना को हटाकर यहां तीन लाख गैलन क्षमता वाली नई जलमीनार बनाने की योजना थी। इसके लिए काम एक निजी एजेंसी को सौंपा गया था। करीब एक महीने से पुरानी टंकी को तोड़ने की प्रक्रिया चल रही थी।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल काम के दौरान अपनाए गए सुरक्षा उपायों को लेकर है। पेयजल विभाग ने ठेकेदार को पहले ही आसपास के लोगों को जानकारी देने और करीब 150 फीट के दायरे में चेतावनी बोर्ड लगाने को कहा था। इसके बावजूद मौके पर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने की बात सामने आ रही है। एक बोर्ड जरूर लगाया गया था, लेकिन उसमें जरूरी संपर्क जानकारी भी पूरी तरह दर्ज नहीं थी।
स्ट्रक्चर जांच के बिना शुरू हुआ काम?
किसी पुरानी और कमजोर इमारत या जलमीनार को गिराने से पहले उसकी स्थिति और गिरने की दिशा का आकलन करना जरूरी होता है। इसके लिए स्ट्रक्चर सेफ्टी जांच और विशेषज्ञ की निगरानी में पूरा प्लान तैयार किया जाता है। आरोप है कि इस जलमीनार को गिराने से पहले ऐसी जांच नहीं कराई गई। पुलिस और प्रशासन अब इसी पहलू की जांच कर रहे हैं।
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ठेकेदार से संपर्क की कोशिश
हादसे के बाद काम कराने वाली एजेंसी के संचालक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन बंद बताया गया। एजेंसी के एक प्रतिनिधि के भी घटनास्थल से चले जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जलमीनार गिराने के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किस स्तर तक किया गया था और लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।




















