BRICS समिट के लिए तैयार दिल्ली, 35+ सड़कें प्रभावित; 100 NSG कमांडो ने किया ‘कवच’ ऑपरेशन

नई दिल्ली में BRICS समिट से पहले राजधानी को खास अंदाज में सजाया गया है। दिल्ली के कई हिस्सों में पोस्टर, लाइटिंग और सजावट की गई है। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। इस साल BRICS समिट की आधिकारिक थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है।
35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक में बदलाव
समिट के दौरान विदेशी मेहमानों और VIP काफिलों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने खास प्लान तैयार किया है। VIP मोटरकेड के गुजरने के दौरान 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। इसके अलावा 35 से ज्यादा सड़कों पर जरूरत के मुताबिक ट्रैफिक को नियंत्रित या डायवर्ट किया जाएगा। एडिशनल CP (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता ने बताया कि VIP काफिले के गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए ट्रैफिक को रोका भी जा सकता है।

दिल्ली में 3 दिन अदालतों का कामकाज प्रभावित
BRICS समिट के चलते दिल्ली हाईकोर्ट और सभी जिला अदालतें 11 सितंबर को बंद रहेंगी। ट्रायल कोर्ट में 12 सितंबर को भी अवकाश रहेगा। इस वजह से दिल्ली की सभी निचली अदालतों में 11, 12 और 13 सितंबर यानी शुक्रवार से रविवार तक लगातार तीन दिन कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा MCD और केंद्र सरकार के सभी कार्यालय भी 11 सितंबर को बंद रहेंगे। हालांकि, अस्पताल, सफाई और जरूरी आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

समिट में शामिल होंगे विदेशी नेता और प्रतिनिधि
BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों, विदेशी प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। दिल्ली पुलिस का फोकस विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षित और सुगम आवाजाही के साथ-साथ आम लोगों को कम से कम परेशानी पहुंचाने पर है।

NSG का ‘ऑपरेशन कवच BRICS’
समिट की सुरक्षा को लेकर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने भी विशेष अभ्यास किया। मंगलवार को करीब 100 NSG कमांडो ने ‘ऑपरेशन कवच BRICS’ के तहत अलग-अलग जगहों पर ड्रिल की। इस अभ्यास का उद्देश्य किसी भी आतंकी खतरे की स्थिति में NSG, दिल्ली पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत संयुक्त कार्रवाई की जा सके।
9 होटलों से भारत मंडपम तक होगी VIP आवाजाही
विदेशी प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए दिल्ली के 9 होटलों को चिन्हित किया गया है। इन सभी होटलों से भारत मंडपम तक जाने वाले रूट की पहचान कर ली गई है। ट्रैफिक पुलिस इन रास्तों पर कारकेड की रिहर्सल कर रही है। साथ ही ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को रूट और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी दी जा रही है।

BRIC से BRICS तक कैसे पहुंचा समूह?
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के BRIC समूह के रूप में हुई थी। इन चार देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE को पूर्ण सदस्य बनाया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बना। इस तरह BRICS में अब 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। इसके अलावा कई साझेदार देश भी समूह से जुड़े हैं। वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक मामलों में BRICS का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
अंतरिक्ष सहयोग पर हो सकता है बड़ा फैसला
BRICS Summit में अंतरिक्ष सहयोग को लेकर भी अहम चर्चा हो सकती है। सदस्य देशों के बीच रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नेटवर्क को मजबूत करने और BRICS Space Council बनाने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की संभावना है। BRICS के 11 सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां इन मुद्दों पर शुरुआती स्तर पर चर्चा कर चुकी हैं। प्रस्ताव के तहत सदस्य देशों के मौजूदा भू-अवलोकन उपग्रहों और उनसे मिलने वाले डेटा को साझा कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना है। इसका फायदा आपदा प्रबंधन में भी मिल सकता है। उदाहरण के लिए भारत में बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदा के दौरान दूसरे सदस्य देशों के सैटेलाइट डेटा से प्रभावित इलाकों की मैपिंग और राहत कार्यों में मदद मिल सकती है।
भारतीय स्पेस कंपनियों के लिए खुल सकता है नया बाजार
BRICS के अंतरिक्ष सहयोग से भारत के निजी स्पेस-टेक सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। भारतीय कंपनियां लॉन्च सेवाओं, छोटे उपग्रहों, सैटेलाइट इमेजरी, भू-अवलोकन, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, कृषि मैपिंग और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में BRICS देशों के साथ साझेदारी कर सकती हैं। अगर साझा डेटा नेटवर्क और प्रस्तावित Space Council को आगे बढ़ाया जाता है, तो भारतीय स्पेस कंपनियों के लिए BRICS देशों में तकनीक, सेवाओं और स्पेस एप्लीकेशन का नया बाजार खुल सकता है।




















